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ईको टूरिज्म सर्किट तैयार करेगा हिमाचल
Shimla
Updated Wed, 18 Jun 2014 05:32 AM IST
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शिमला। वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी ने कहा कि प्रदेश में ईको-टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश में ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए सरकार अनेक सुविधाएं उपलब्ध करवा रही है। भरमौरी ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए सरकार के किए गए प्रयासों की समीक्षा बैठक कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ईको-टूरिज्म के तहत प्रदेश में 23 पर्यटक स्थल चिह्नित किए गए हैं। यहां पर्यटकों के लिए खान-पान, साफ-सफाई, नियंत्रित परिवहन सुविधा, टूरिस्ट गाइड आदि सुविधाएं देने के लिए स्थानीय युवाओं का सहयोग लिया जाएगा।
स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए कौशल विकास भत्ता योजना और मनरेगा जैसी योजनाओं से धनराशि उपलब्ध करवाने की संभावनाओं का पता लगाया जाएगा। भरमौरी ने ईको-टूरिज्म सर्किट तय करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने विभाग के अधिकारियों को इस बारे में रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। उन्होंने साहसिक और धार्मिक पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए प्रदेश वन निगम के नारकंडा और जलोड़ी में नेचर कैंप संचालित किए जा रहे हैं।
वन निगम के उपाध्यक्ष केवल सिंह पठानिया ने ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए परामर्शदाता तैनात करने की बात कही। उन्होंने बंगलूरू के मॉडल तथा उत्तराखंड में ईको-टूरिज्म के लिए तैयार की गई अधोसंरचना के अध्ययन का भी सुझाव दिया। प्रधान सचिव वन तरुण श्रीधर, प्रधान मुख्य अरण्यपाल आरके गुप्ता, प्रबंध निदेशक वन निगम जेएस वालिया, प्रधान मुख्य अरण्यपाल (वन्य प्राणी) डॉ. ललित मोहन, अतिरिक्त प्रधान मुख्य अरण्यपाल अवतार सिंह, अतिरिक्त प्रधान मुख्य अरण्यपाल एसएस नेगी आदि बैठक में उपस्थित थे।
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स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए कौशल विकास भत्ता योजना और मनरेगा जैसी योजनाओं से धनराशि उपलब्ध करवाने की संभावनाओं का पता लगाया जाएगा। भरमौरी ने ईको-टूरिज्म सर्किट तय करने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने विभाग के अधिकारियों को इस बारे में रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। उन्होंने साहसिक और धार्मिक पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए प्रदेश वन निगम के नारकंडा और जलोड़ी में नेचर कैंप संचालित किए जा रहे हैं।
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वन निगम के उपाध्यक्ष केवल सिंह पठानिया ने ईको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए परामर्शदाता तैनात करने की बात कही। उन्होंने बंगलूरू के मॉडल तथा उत्तराखंड में ईको-टूरिज्म के लिए तैयार की गई अधोसंरचना के अध्ययन का भी सुझाव दिया। प्रधान सचिव वन तरुण श्रीधर, प्रधान मुख्य अरण्यपाल आरके गुप्ता, प्रबंध निदेशक वन निगम जेएस वालिया, प्रधान मुख्य अरण्यपाल (वन्य प्राणी) डॉ. ललित मोहन, अतिरिक्त प्रधान मुख्य अरण्यपाल अवतार सिंह, अतिरिक्त प्रधान मुख्य अरण्यपाल एसएस नेगी आदि बैठक में उपस्थित थे।
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