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सेवाविस्तार देने पर उठे सवाल
Shimla
Updated Sun, 25 May 2014 05:34 AM IST
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शिमला। हिमाचल सरकार ने रिटायरमेंट की उम्र न बढ़ाकर सरकारी कर्मचारियों को एक साल का सशर्त सेवाविस्तार दिया है। इस कदम से अधिकांश कर्मचारी संगठन सहमत नहीं हैं। इस फैसले के बाद कर्मचारी संगठनों ने अलग अलग प्रतिक्रिया अमर उजाला को दी।
हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ (जोगटा गुट) के प्रदेशाध्यक्ष एसएस जोगटा ने कहा कि कर्मचारियों का सेवाकाल बढ़ाने की मांग को उन्हीं के संगठन ने सरकार के समक्ष प्राथमिकता से उठाया था। इसे 60 साल तक करने की मांग की गई थी। अगर इसे बढ़ाया गया है तो यह अच्छा है। हम इका स्वागत करते हैं।
हिमाचल प्रदेश कर्मचारी परिसंघ संघ के अध्यक्ष विनोद कुमार ने कहा कि आर्थिक संकट से ग्रस्त सरकार ने ये कदम उठाया है। इसके पीछे यही तर्क लग रहा है कि सरकार की वित्तीय स्थिति ठीक है। विनोद कुमार ने कहा कि इससे कर्मचारियों की पदोन्नतियां प्रभावित होंगी। सेवानिवृत्ति अवधि अगर बढ़ानी ही थी तो इसे 60 साल किया जा सकता है। 59 साल का यह फार्मूला भी समझ में नहीं आ रहा है। इसमें पिक एंड चूज की शंका उत्पन्न हो रही है।
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पिछली जेसीसी की बैठक के समय हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष रहे सुरेंद्र ठाकुर ने कहा कि सरकार को अगर आयु बढ़ानी है तो उसे उन सारे लाभों के साथ बढ़ाना चाहिए, जो कर्मचारियों को देय हैं। इससे कर्मचारियों में भेदभाव और रंजिश बढ़ेगी। प्रमोशन भी रुक प्रभावित हो सकती है। इसे केंद्र सरकार की तर्ज पर सभी लाभों के साथ 60 साल किया जाना चाहिए।
हिमाचल प्रदेश सचिवालय सेवाएं कर्मचारी संघ के महासचिव संजीत शर्मा ने कहा कि सरकार का ये नीतिगत फैसला है। इसका असर देखना होगा। अच्छा होगा यदि इससे प्रमोशन न रुके और बेरोजगारों पर भी बुरा असर न हो। हिमाचल प्रदेश मेडिकल अधिकारी संघ के महासचिव डा. जीवानंद चौहान ने कहा कि इस बारे में लोगों में विभाजित विचार हैं। अगर मैं व्यक्तिगत विचार रखूं तो इससे युवाओं के लिए रोजगार के अवसर कम हो जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग में उम्र बढ़ाकर रिजल्ट अच्छे नहीं रहे हैं।
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हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ (जोगटा गुट) के प्रदेशाध्यक्ष एसएस जोगटा ने कहा कि कर्मचारियों का सेवाकाल बढ़ाने की मांग को उन्हीं के संगठन ने सरकार के समक्ष प्राथमिकता से उठाया था। इसे 60 साल तक करने की मांग की गई थी। अगर इसे बढ़ाया गया है तो यह अच्छा है। हम इका स्वागत करते हैं।
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हिमाचल प्रदेश कर्मचारी परिसंघ संघ के अध्यक्ष विनोद कुमार ने कहा कि आर्थिक संकट से ग्रस्त सरकार ने ये कदम उठाया है। इसके पीछे यही तर्क लग रहा है कि सरकार की वित्तीय स्थिति ठीक है। विनोद कुमार ने कहा कि इससे कर्मचारियों की पदोन्नतियां प्रभावित होंगी। सेवानिवृत्ति अवधि अगर बढ़ानी ही थी तो इसे 60 साल किया जा सकता है। 59 साल का यह फार्मूला भी समझ में नहीं आ रहा है। इसमें पिक एंड चूज की शंका उत्पन्न हो रही है।
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पिछली जेसीसी की बैठक के समय हिमाचल प्रदेश अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष रहे सुरेंद्र ठाकुर ने कहा कि सरकार को अगर आयु बढ़ानी है तो उसे उन सारे लाभों के साथ बढ़ाना चाहिए, जो कर्मचारियों को देय हैं। इससे कर्मचारियों में भेदभाव और रंजिश बढ़ेगी। प्रमोशन भी रुक प्रभावित हो सकती है। इसे केंद्र सरकार की तर्ज पर सभी लाभों के साथ 60 साल किया जाना चाहिए।
हिमाचल प्रदेश सचिवालय सेवाएं कर्मचारी संघ के महासचिव संजीत शर्मा ने कहा कि सरकार का ये नीतिगत फैसला है। इसका असर देखना होगा। अच्छा होगा यदि इससे प्रमोशन न रुके और बेरोजगारों पर भी बुरा असर न हो। हिमाचल प्रदेश मेडिकल अधिकारी संघ के महासचिव डा. जीवानंद चौहान ने कहा कि इस बारे में लोगों में विभाजित विचार हैं। अगर मैं व्यक्तिगत विचार रखूं तो इससे युवाओं के लिए रोजगार के अवसर कम हो जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग में उम्र बढ़ाकर रिजल्ट अच्छे नहीं रहे हैं।