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गांधी के पोते का उच्च अध्ययन संस्थान से इस्तीफा
Shimla
Updated Sun, 25 May 2014 05:34 AM IST
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शिमला। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान के चेयरमैन पद से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पोते गोपालकृष्ण गांधी ने इस्तीफा दे दिया है। गोपालकृष्ण गांधी को इस संस्थान में 24 फरवरी 2012 को बतौर अध्यक्ष नियुक्ति दी गई थी।
पूर्व आईएएस अधिकारी गोपालकृष्ण गांधी ने यह इस्तीफा मोदी सरकार बनने के तुरंत बाद दिया है। इसलिए इस इस्तीफे को सरकार के बदलाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। गोपालकृष्ण गांधी ने यह इस्तीफा दिल्ली में दिया है। उनका कार्यकाल जनवरी 2015 में पूरा होना था। गोपालकृष्ण गांधी ने चेन्नई की कलाक्षेत्रा फाउंडेशन से भी इस्तीफा दिया है। गोपालकृष्ण वर्ष 2004 से लेकर 2009 तक पश्चिम बंगाल के गवर्नर रह चुके हैं। वह राष्ट्रपति के सचिव के अलावा दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका में हाई कमिश्नर रह चुके हैं। गोपालकृष्ण गांधी इस संस्थान के ऐतिहासिक भवन के जीर्णोद्धार को केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय से 50 करोड़ रुपये की केंद्रीय आर्थिक सहायता को मंजूर करवाने में सफल रहे हैं। 1884 में वायसरीगल लॉज के रूप में बनाए गए इस ऐतिहासिक भवन को कला संकाय और सामाजिक विज्ञानों के अनुसंधान संस्थान के रूप में वर्ष 1965 में दर्जा मिला। गोपालकृष्ण गांधी ने इस संस्थान के चेयरमैन पद से दिए गए इस्तीफे पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
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पूर्व आईएएस अधिकारी गोपालकृष्ण गांधी ने यह इस्तीफा मोदी सरकार बनने के तुरंत बाद दिया है। इसलिए इस इस्तीफे को सरकार के बदलाव से भी जोड़कर देखा जा रहा है। गोपालकृष्ण गांधी ने यह इस्तीफा दिल्ली में दिया है। उनका कार्यकाल जनवरी 2015 में पूरा होना था। गोपालकृष्ण गांधी ने चेन्नई की कलाक्षेत्रा फाउंडेशन से भी इस्तीफा दिया है। गोपालकृष्ण वर्ष 2004 से लेकर 2009 तक पश्चिम बंगाल के गवर्नर रह चुके हैं। वह राष्ट्रपति के सचिव के अलावा दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका में हाई कमिश्नर रह चुके हैं। गोपालकृष्ण गांधी इस संस्थान के ऐतिहासिक भवन के जीर्णोद्धार को केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय से 50 करोड़ रुपये की केंद्रीय आर्थिक सहायता को मंजूर करवाने में सफल रहे हैं। 1884 में वायसरीगल लॉज के रूप में बनाए गए इस ऐतिहासिक भवन को कला संकाय और सामाजिक विज्ञानों के अनुसंधान संस्थान के रूप में वर्ष 1965 में दर्जा मिला। गोपालकृष्ण गांधी ने इस संस्थान के चेयरमैन पद से दिए गए इस्तीफे पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
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