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कौशल भत्ते के लिए नए केंद्रों का पंजीकरण रुका
Shimla
Updated Fri, 25 Apr 2014 05:30 AM IST
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शिमला। हिमाचल में कौशल विकास भत्ते के लिए नए प्रशिक्षण केंद्रों का पंजीकरण रुक गया है। लोकसभा चुनाव के चलते इन केंद्रों का रजिस्ट्रेशन रुका है। ऐसे में सवाल खड़ा हो गया है कि नए वित्त वर्ष का लगभग एक माह बीतने लगा है, पर कौशल विकास केंद्रों को बेरोजगारों को भत्ता दिलाने के लिए पंजीकृत नहीं किया जा सका है। ऐसे में इस साल 190 करोड़ रुपये का प्रस्तावित बजट कैसे खर्च होगा? यह सवाल खड़ा है।
कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद कौशल विकास योजना शुरू की है। इसके तहत कौशल विकास भत्ता देने का प्रावधान हुआ। सरकार ने तय किया कि इस योजना में हर साल 100-100 करोड़ खर्च होंगेे। आगामी पांच साल तक कुल 500 करोड़ खर्च होंगे। पहले वित्त वर्ष 2013-14 में यह योजना कई पेंचों में फंसी रहीं। पहले साल लगभग 10 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाए। तकरीबन 90 करोड़ रुपये खर्चे नहीं हो पाए। फिर यह तय किया गया कि इसे आगे 2014-15 में व्यय किया जाएगा। यानी नए वित्त वर्ष में 100 करोड़ रुपये के साथ पुराना लंबित 90 करोड़ रुपये बजट भी खर्च किया जाना है। पर लोकसभा चुनाव प्रक्रिया के बीच कई नए केंद्रों से आवेदन आने के बावजूद न तो इनका इंस्पेक्शन हो रहा है और न ही इन्हें सूचीबद्ध किया जा पा रहा है। इन्हें सूचीबद्ध करने के लिए उपायुक्तों की अध्यक्षता में कमेटियां बनी हुई हैं। अब इस कार्य को चुनाव प्रक्रिया निपटने के बाद ही गति मिल पाएगी।
हिमाचल प्रदेश श्रम एवं रोजगार विभाग के उपनिदेशक केके शर्मा ने कहा कि हो सकता है कि उपायुक्तों की अध्यक्षता की जिला कमेटियां इस बारे में निर्णय नहीं ले पा रही हों। इसकी वजह लोकसभा चुनाव हैं। चुनाव निपटते ही यह प्रक्रिया गति पकड़ेगी।
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कांग्रेस सरकार ने सत्ता में आने के बाद कौशल विकास योजना शुरू की है। इसके तहत कौशल विकास भत्ता देने का प्रावधान हुआ। सरकार ने तय किया कि इस योजना में हर साल 100-100 करोड़ खर्च होंगेे। आगामी पांच साल तक कुल 500 करोड़ खर्च होंगे। पहले वित्त वर्ष 2013-14 में यह योजना कई पेंचों में फंसी रहीं। पहले साल लगभग 10 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाए। तकरीबन 90 करोड़ रुपये खर्चे नहीं हो पाए। फिर यह तय किया गया कि इसे आगे 2014-15 में व्यय किया जाएगा। यानी नए वित्त वर्ष में 100 करोड़ रुपये के साथ पुराना लंबित 90 करोड़ रुपये बजट भी खर्च किया जाना है। पर लोकसभा चुनाव प्रक्रिया के बीच कई नए केंद्रों से आवेदन आने के बावजूद न तो इनका इंस्पेक्शन हो रहा है और न ही इन्हें सूचीबद्ध किया जा पा रहा है। इन्हें सूचीबद्ध करने के लिए उपायुक्तों की अध्यक्षता में कमेटियां बनी हुई हैं। अब इस कार्य को चुनाव प्रक्रिया निपटने के बाद ही गति मिल पाएगी।
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हिमाचल प्रदेश श्रम एवं रोजगार विभाग के उपनिदेशक केके शर्मा ने कहा कि हो सकता है कि उपायुक्तों की अध्यक्षता की जिला कमेटियां इस बारे में निर्णय नहीं ले पा रही हों। इसकी वजह लोकसभा चुनाव हैं। चुनाव निपटते ही यह प्रक्रिया गति पकड़ेगी।
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