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ठियोग-हाटकोटी सड़क की फाइल अटकी
Shimla
Updated Tue, 15 Apr 2014 05:32 AM IST
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शिमला। सेब उत्पादक क्षेत्र की लाइफ लाइन माने जाने वाली ठियोग-हाटकोटी सड़क की फाइल सरकारी प्रक्रिया में अटक गई है। करीब 80 किलोमीटर लंबी इस सड़क का टेंडर 321 करोड़ में गुड़गांव की सीएंसी कंस्ट्रक्शन कंपनी को मिला है। 19 नवंबर 2013 को राज्य सरकार, वर्ल्ड बैंक और कंपनी के बीच एग्रीमेंट साइन हुआ है, लेकिन अब तक कंपनी को स्टोन क्रशर लगाने की अनुमति नहीं मिली है। इस कारण बड़े स्तर पर काम शुरू नहीं हो पाया।
इस सड़क पर काम करने के लिए आजकल का वक्त सबसे सही है। कुछ महीने बाद सेब सीजन दोबारा शुरू हो जाएगा। पिछले पांच साल से इस सड़क का काम सरकार के गले फंसा है। 2008 में इस सड़क की चौड़ाई का काम चीन की लोंगजियान रोड एंड ब्रिजिज कंपनी को मिला था, लेकिन तीन साल काम करने के बाद कंपनी वापस चली गई। कई जगह सड़क को चौड़ा करने के लिए हुई खुदाई ही अब लोगों के लिए परेशानी बन गई है। सड़क पर गड्ढे होने के कारण लोगों और बागवानों को भी दिक्कत हो रही है। सड़क से होकर जाने वाले वाहनों को नुकसान हो रहा है।
लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता नरेश शर्मा ने बताया कि एग्रीमेंट होने के बाद सीएंडसी कंपनी ने काम शुरू तो कर दिया था। हालांकि ये कितना हो पाया है, ये जानकारी अभी उनके पास नहीं है। क्रशर की क्लीयरेंस उद्योग विभाग देता है। उद्योग निदेशक राजेंद्र सिंह ने बताया कि कि स्टोन क्रशर लगाने के नियम बदले हैं। यदि अनुमति देने में छूट देनी हो तो मंजूरी सरकार से आती है। चुनाव का वक्त है। कैबिनेट की बैठक में ही फाइल पर फैसला होगा।
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इनसेट
कैबिनेट की बैठकें तो कई हुई
उद्योग विभाग बेशक कैबिनेट की बैठक में फैसला होने की बात कह रहा हो, लेकिन कंपनी की ओर से आवेदन के बाद भी बैठकें हुई। चुनाव आचार संहिता से पहले 4 मार्च को भी बैठक हुई थी। तब उद्योग विभाग ने फाइल कैबिनेट में रखी होती तो फैसला हो सकता था। फाइल सरकार को भेजे जाने का एक अर्थ ये भी है कि कंपनी ने सारी क्लीयरेंस ले ली हैं।
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इस सड़क पर काम करने के लिए आजकल का वक्त सबसे सही है। कुछ महीने बाद सेब सीजन दोबारा शुरू हो जाएगा। पिछले पांच साल से इस सड़क का काम सरकार के गले फंसा है। 2008 में इस सड़क की चौड़ाई का काम चीन की लोंगजियान रोड एंड ब्रिजिज कंपनी को मिला था, लेकिन तीन साल काम करने के बाद कंपनी वापस चली गई। कई जगह सड़क को चौड़ा करने के लिए हुई खुदाई ही अब लोगों के लिए परेशानी बन गई है। सड़क पर गड्ढे होने के कारण लोगों और बागवानों को भी दिक्कत हो रही है। सड़क से होकर जाने वाले वाहनों को नुकसान हो रहा है।
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लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता नरेश शर्मा ने बताया कि एग्रीमेंट होने के बाद सीएंडसी कंपनी ने काम शुरू तो कर दिया था। हालांकि ये कितना हो पाया है, ये जानकारी अभी उनके पास नहीं है। क्रशर की क्लीयरेंस उद्योग विभाग देता है। उद्योग निदेशक राजेंद्र सिंह ने बताया कि कि स्टोन क्रशर लगाने के नियम बदले हैं। यदि अनुमति देने में छूट देनी हो तो मंजूरी सरकार से आती है। चुनाव का वक्त है। कैबिनेट की बैठक में ही फाइल पर फैसला होगा।
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कैबिनेट की बैठकें तो कई हुई
उद्योग विभाग बेशक कैबिनेट की बैठक में फैसला होने की बात कह रहा हो, लेकिन कंपनी की ओर से आवेदन के बाद भी बैठकें हुई। चुनाव आचार संहिता से पहले 4 मार्च को भी बैठक हुई थी। तब उद्योग विभाग ने फाइल कैबिनेट में रखी होती तो फैसला हो सकता था। फाइल सरकार को भेजे जाने का एक अर्थ ये भी है कि कंपनी ने सारी क्लीयरेंस ले ली हैं।
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