Soal Worrier: 13 साल की उम्र से ही यह लड़की बांट रही जरुरतमंदो को जूते, जानिए क्या है सिया गोडिका की कहानी
सिया गोडिका बेंगलुरु की एक प्रेरक युवा हैं, जिन्होंने 13 साल की उम्र में 'सोल वॉरियर्स' संस्था शुरू की। इसका मकसद जरूरतमंद बच्चों, महिलाओं और पुरुषों को जूते देना है। सिया और उनकी टीम ने 5 सालों में 28,000 जोड़ी जूते बांट चुकी हैं। आइए उनके बारे में विस्तार से जानते हैं।
विस्तार
Soal Worrier: बेंगलुरु की 18 वर्षीय सिया गोडिका ने बचपन में निर्माण स्थलों पर काम करने वाले मजदूरों के बच्चों को नंगे पांव देखकर एक ऐसा सपना देखा, जिसने हजारों जरूरतमंदों के पैरों को जूते पहना दिए। सिया ने अपनी इस पहल के जरिए 'सोल वॉरियर्स' नामक एक संस्था की स्थापना की, जो आज भारत समेत चार देशों में जरूरतमंद बच्चों, महिलाओं और पुरुषों को जूते उपलब्ध करा रही है। सोल वॉरियर्स के स्वयंसेवकों ने अब तक लगभग 28,000 जोड़ी जूते जरूरतमंदों तक पहुंचाया है।
एक इंटरव्यू में सिया ने बताया कि वह अक्सर उन बच्चों के फटे, गंदे और खून से सने पांव देखती थीं। छोटी उम्र में ही उन्होंने महसूस किया कि उनके पास सब कुछ है, जबकि इन बच्चों के पास बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। इसी सोच के साथ सिया ने अपने घर की पुरानी जूतों की अलमारी खोली और पाया कि कई ऐसे जूते हैं जिन्हें उन्होंने सालों से पहना भी नहीं है। तभी उन्होंने उन जूतों को जरूरतमंद बच्चों को देने का फैसला किया। अब यह कहानी आज बहुत से लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। इसलिए आइए सिया गोडिका के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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जरूरतमंद को जूते उपलब्ध कराने विचार को आगे बढ़ाते हुए सिया ने अपने माता-पिता और कुछ सामुदायिक स्वयंसेवकों की मदद से 'सोल वॉरियर्स' की नींव रखी। संस्था का मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को जूते उपलब्ध कराना था, ताकि वे बेहतर जीवन जी सकें। सिया ने अपनी इस पहल को लोगों तक पहुंचाने के लिए पोस्टर और व्हाट्सएप ग्रुप का सहारा लिया। उन्होंने लोगों से पुराने और इस्तेमाल न किए गए जूते दान करने की अपील की। हालांकि, सिया की यह यात्रा आसान नहीं थी। उन्हें हर दिन कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। शुरुआत में लोगों को उनकी उम्र कम होने के कारण उन पर भरोसा करने में हिचकिचाहट हुई। सहयोगियों को ढूंढना भी उनके लिए एक मुश्किल काम था। मगर सिया ने हार नहीं मानी और अपने दृढ़ संकल्प से आगे बढ़ती रहीं।
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डायना पुरस्कार का मिला सम्मान
सिया गोडिका की मेहनत रंग लाई और पहले ही वितरण अभियान में 'सोल वॉरियर्स' ने 700 जोड़ी जूते एकत्र किए और उन्हें जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचाया। सिया ने इन जूतों को इकट्ठा करने के साथ-साथ जूते बनाने वालों की मदद से उनकी मरम्मत भी करवाई, ताकि पुराने जुते और भी बेहतर लगे और ज्यादा समय तक चल सकें। आज 'सोल वॉरियर्स' को स्थापित हुए पांच साल हो चुके हैं और इस संस्था ने अमेरिका, चीन और लाइबेरिया जैसे देशों तक अपनी पहुंच बना ली है। लगभग 80 स्वयंसेवकों की एक मजबूत टीम के साथ 'सोल वॉरियर्स' अब तक लगभग 28,000 जोड़ी जूते जरूरतमंदों तक पहुंचा चुका है। यह संख्या सिया और उनकी टीम की कड़ी मेहनत और समर्पण का परिणाम है। सिया के इस उल्लेखनीय सामाजिक कार्य को 2021 में 'डायना पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार युवाओं को उनके सामाजिक कार्यों के लिए दिया जाता है और सिया की प्रेरणादायक कहानी कई युवाओं के लिए अब एक मिसाल बन गई है।
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