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रितु ओबेरॉय शहरी महिलाओं तक पहुंचा रहीं हैंडलूम साड़ियां, उनके कारीगर ही हैं उनकी टीम
Thu, 20 May 2021 09:30 AM IST
अपराजिता शुक्ला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अपराजिता शुक्ला
Updated Thu, 20 May 2021 09:30 AM IST
सार
रितु ओबेरॉय गांव के कारीगरों की मदद से मेट्रो शहरों में हैंडलूम साड़ियों का व्यवसाय करती हैं।
फॉर सारीज नाम के अपने ब्रांड की मदद से वो गांव के कारीगरों को शहरों में उचित रोजगार मुहैया कराती हैं।
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saree
- फोटो : instagram
विस्तार
मीडिया और विज्ञापन के क्षेत्र में कई सालों तक काम करने के बाद रितु ओबेरॉय अपने घूमने-फिरने के शौक को पूरा कर रही थीं। इस दौरान उन्हें कई सारे कारीगर ऐसे दिखे जो गांव में साड़ियां बुनते हैं। लेकिन उन्हें अपनी मेहनत का सही दाम नहीं मिलता। रितु ने बताया कि उन्हें साड़ी पहनना अच्छा लगता है लेकिन मेट्रो सिटी में हैंडलूम की साड़ियां आसानी से नहीं मिलती।
ऐसे में उन्हें इन कारीगरों की साड़ियों को मेट्रो सिटी में बेचने का ख्याल आया। साल 2018 में रितु ने फॉर सारीज की शुरूआत की। अपने ब्रांड के माध्यम से वो गांव के कारीगरों की साड़ियों को शहरों में लाकर बेचती हैं। इसके साथ ही कारीगरों को रोजगार भी मुहैया कराती हैं। वो कहती हैं कि साड़ियां तैयार करने वाले कारीगर ही उनकी कोर टीम हैं। रितु की ये साड़ियां ज्यादातर राजस्थान, संबलपुर, बुर्दवान, कच्छ, चंदेरी, शांतिनिकेतन, अजरखपुर के कारीगरों के माध्यम से संचालित करती हैं।
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ऐसे में उन्हें इन कारीगरों की साड़ियों को मेट्रो सिटी में बेचने का ख्याल आया। साल 2018 में रितु ने फॉर सारीज की शुरूआत की। अपने ब्रांड के माध्यम से वो गांव के कारीगरों की साड़ियों को शहरों में लाकर बेचती हैं। इसके साथ ही कारीगरों को रोजगार भी मुहैया कराती हैं। वो कहती हैं कि साड़ियां तैयार करने वाले कारीगर ही उनकी कोर टीम हैं। रितु की ये साड़ियां ज्यादातर राजस्थान, संबलपुर, बुर्दवान, कच्छ, चंदेरी, शांतिनिकेतन, अजरखपुर के कारीगरों के माध्यम से संचालित करती हैं।
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रितु पिछले दो साल से शांतिनिकेतन के पास कांथा प्रोजेक्ट चला रही हैं। इसका उद्देश्य महिला कारीगरों को सशक्त बनाना और उन्हें आय के साधन उपलब्ध कराना है। इन कारीगरों द्वारा तैयार किए गए हर रेंज के प्रोडक्ट वे अपने कस्टमर तक पहुंचाती हैं ताकि आम लोगों के बीच फैली यह धारणा दूर हो सके कि हैंडलूम प्रोडक्ट्स हमेशा महंगे होते हैं। फिलहाल वे 10 राज्यों के 250 कारीगरों के साथ काम कर रही हैं। उनका प्रोजेक्ट कई अन्य लोगों के लिए भी फायदेमंद साबित हुआ है।
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