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बिहार: बंदी को 16 दिन अवैध रूप से जेल में रखा, जेल उपाधीक्षक की वेतनवृद्धि रोकी; 50 हजार रुपये हर्जाना

Fri, 30 Oct 2026 09:34 AM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: आशुतोष प्रताप सिंह Updated Fri, 30 Oct 2026 09:34 AM IST
सार

बिहार के हाजीपुर मंडल कारा में जमानत और रिहाई का आदेश मिलने के बावजूद रामनिवास गुप्ता को 16 दिन तक जेल में रखने के मामले में गृह विभाग ने कार्रवाई की है। विभाग ने तत्कालीन जेल उपाधीक्षक और वर्तमान में बगहा उपकारा में तैनात भजन दास की एक वेतनवृद्धि असंचयी प्रभाव से रोक दी है।

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bihar hajipur jail prisoner illegal detention 16 days deputy superintendent bhajan das 50000 compensation
पटना हाई कोर्ट - फोटो : अमर उजाला डिजिटल

विस्तार

बिहार में एक बंदी को रिहाई का आदेश मिलने के बावजूद 16 दिन तक जेल में रखने के मामले में गृह विभाग ने सख्त कार्रवाई की है। हाजीपुर मंडल कारा के तत्कालीन उपाधीक्षक और वर्तमान में बगहा उपकारा में तैनात भजन दास की एक वेतनवृद्धि असंचयी प्रभाव से रोक दी गई है। इसके साथ ही प्रशासनिक लापरवाही के लिए दोषी अधिकारी से 50 हजार रुपये की वसूली कर पीड़ित बंदी को देने का आदेश दिया गया है। यह कार्रवाई पटना उच्च न्यायालय के निर्देश और विभागीय जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद की गई है।

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जमानत और रिहाई का आदेश मिलने के बाद भी 16 दिन जेल में रहा बंदी

पूरा मामला हाजीपुर मंडल कारा में बंद रहे रामनिवास गुप्ता से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, रामनिवास गुप्ता को न्यायालय से जमानत और रिहाई का स्पष्ट आदेश मिल गया था। इसके बावजूद जरूरी अभिरक्षा अधिपत्र (कस्टडी वारंट) और उचित प्राधिकार पत्र नहीं होने के कारण उन्हें जेल से रिहा नहीं किया गया।

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इस लापरवाही के चलते बंदी को 21 सितंबर 2024 से 7 अक्टूबर 2024 तक यानी कुल 16 दिन अतिरिक्त जेल में रहना पड़ा। इस मामले को लेकर पटना उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी।

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पटना हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी, एक लाख रुपये मुआवजे का आदेश

मामले की सुनवाई के दौरान पटना उच्च न्यायालय ने बंदी को निर्धारित समय के बाद भी जेल में रखने पर कड़ी नाराजगी जताई। उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता रामनिवास गुप्ता को एक लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया था। इसके बाद सरकार ने प्रशासनिक लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारी से 50 हजार रुपये की राशि वसूलकर पीड़ित को देने का फैसला किया।

विभागीय जांच में उपाधीक्षक पर लगे आरोप सही पाए गए

इस मामले में कराई गई विभागीय जांच के दौरान तत्कालीन जेल उपाधीक्षक भजन दास पर लगाए गए आरोप सही पाए गए। जांच रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने अधिकारी से मांगा गया दूसरा स्पष्टीकरण भी अस्वीकार कर दिया। इससे पहले मामले में उन्हें निलंबित भी किया गया था।

एक वेतनवृद्धि रोकी, निलंबन अवधि को लेकर भी आदेश जारी

बिहार कारा एवं सुधार सेवाएं के महानिदेशक की स्वीकृति मिलने के बाद गृह विभाग ने बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमावली, 2005 के तहत दंडात्मक आदेश जारी किया है। इसके तहत भजन दास की एक वेतनवृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकने का निर्णय लिया गया है।
आदेश में निलंबन अवधि के भुगतान और सेवा गणना को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। इसके अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान अधिकारी को केवल जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। हालांकि, इस अवधि की गणना पेंशन प्रदायी सेवा के रूप में की जाएगी।


इस कार्रवाई के जरिए गृह विभाग ने स्पष्ट किया है कि न्यायालय के रिहाई आदेश के बावजूद किसी बंदी को जेल में रखना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही है और इसके लिए संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी।

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