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जंग खा रही साठ लाख की एंबुलेंस

Wed, 25 Dec 2013 10:09 PM IST
पठानकोट
पठानकोट Updated Wed, 25 Dec 2013 10:09 PM IST
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Rusting of six million ambulances
सेहत मंत्री सुरजीत ज्याणी सूबे में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने का दावा कर रहे हैं, लेकिन सरकारी अस्पतालों में मौजूद अत्याधुनिक उपकरणों को प्रयोग में लाने के लिए विभाग कुछ नहीं कर रहा है। सूरतेहाल यह है कि केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय की ओर से पठानकोट में भेजी गई साठ लाख रुपये की अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस एंबुलेंस पार्किंग में शोपीस बनकर खड़ी है। छह महीने से विभाग ने एंबुलेंस को सड़क पर लाने के लिए रजिस्ट्रेशन नंबर के लिए आवेदन तक नहीं किया है।
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मालूम हो कि मंत्रालय की ओर से पूरे देश में 55 और पंजाब में पठानकोट समेत तीन ट्रामा सेंटरों में तीन अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस एंबुलेंस उपलब्ध कराई हैं। प्रत्येक एंबुलेंस की कीमत 60 लाख रुपये है। पठानकोट तीन राज्यों हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर का प्रवेश द्वार है और राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे होने के कारण अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस एंबुलेंस का विशेष महत्व है।
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सेहत सुविधाओं के हिसाब से एंबुलेंस में वेंटिलेटर,  कार्डिक वेंटिलेटर, ईसीजी समेत आपात स्थिति में मरीज को शिफ्ट कर लुधियाना, अमृतसर और जालंधर पहुंचाने के लिए अत्याधुनिक मशीन उपलब्ध हैं, लेकिन एंबुलेंस का हाल भी ट्रामा सेंटर की तरह है। ट्रामा सेंटर में डॉक्टर मौजूद नहीं हैं, लिहाजा दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने वाले लोगों को  शिफ्ट करना पड़ रहा है। वहीं केंद्र ने एंबुलेंस भेजकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। शुरुआत में मशीन भेजने के साथ ही केंद्र ने अस्पताल के स्टाफ को ट्रेनिंग भी दी, लेकिन उसके बाद से एंबुलेंस पार्किंग में खड़ी है। आज तक इसे इस्तेमाल नहीं लाया जा सका है। एंबुलेंस में मरीज की देखरेख और मशीनें चलाने के लिए आपरेटर और ड्राइवर तक की व्यवस्था नहीं की जा सकी है।
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तीन आपरेटर और दो ड्राइवरों की जरूरत
सेहत विभाग के मुताबिक एंबुलेंस के लिए तीन आपरेटर और दो ड्राइवरों की जरूरत है लेकिन उसकी व्यवस्था नहीं होने की वजह से अस्पताल के उपलब्ध डॉक्टर और ड्राइवर से ही उसे चलाने की व्यवस्था करनी पड़ेगी। दूसरी तरफ अस्पताल प्रशासन का लापरवाही भरा आलम है कि आरसी के लिए किसी ने आवेदन तक नहीं किया है।


जिला प्रशासन को लिखा है : एसएमओ
इस संबंध में सिविल पठानकोट के एसएमओ डॉ. विजय निझावन ने कहा कि एंबुलेंस को सड़क पर लाने के लिए रजिस्ट्रेशन नंबर व इंश्योरेंस करवानी है जो मुफ्त होनी है। इसके लिए जिला प्रशासन को लिखा जा रहा है। दस्तावेज पूरे होने के बाद एंबुलेंस को मरीजों की सुविधाओं के लिए मुहैया करा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि एंबुलेंस के बारे में जानकारी देने के लिए केंद्र की एक टीम ने अस्पताल के डॉक्टरों को एक बार ट्रेनिंग दी थी, लेकिन उसके बाद अभी तक आगे कुछ नहीं किया गया है।

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