गो रक्षा के प्रति गंभीर नहीं पंजाब सरकार

पठानकोट Updated Tue, 26 Nov 2013 10:51 PM IST
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Punjab government not serious

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प्रदेश में गो रक्षा के प्रति पंजाब सरकार गंभीर नहीं है। आलम यह है कि गो सेवा आयोग के गठन से सरकार ने अपना पल्ला झाड़ लिया है। अब तक चेयरमैन की घोषणा भी नहीं की गई है। वहीं लावारिस पशुओं के संरक्षण के लिए गो रक्षा बोर्ड (विघटित) की ओर से भेजा 6.32 करोड़ का प्रोजेक्ट मुख्यमंत्री के दफ्तर में धूल फांक रहा है। बोर्ड के पूर्व चेयरमैन कीमती भगत भी दबी जुबान में सरकार के ढीलेपन की बात स्वीकारते हैं।
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गो तस्कर पूरे प्रदेश में सक्रिय होते जा रहे हैं। मानसा से लेकर पठानकोट, गुरदासपुर, मालेरकोटला में गो हत्या के मामले सामने हो चुके हैं। जानकारी के मुताबिक देश के नौ राज्यों में गो सेवा आयोग का गठन किया गया था। राज्य में भी मांग उठने पर पूर्व में अकाली-भाजपा सरकार ने गो रक्षा बोर्ड का गठन कर लिया और जालंधर से भाजपा नेता कीमती भगत को उसका चेयरमैन बना दिया। दो साल तक प्रदेश में गो रक्षा  बोर्ड का काम चलता रहा। बोर्ड के पूर्व चेयरमैन कीमती भगत के मुताबिक पूरे प्रदेश में 1.8 लाख लावारिस पशु सड़कों पर घूम रहे हैं और रोजाना औसतन 30 ट्रक बूचड़खाने में पशुओं को लादकर ले जाए जाते हैं।
बोर्ड की ओर से पूर्व में पंजाब सरकार को 6.32 करोड़ का प्रोजेक्ट बनाकर भेजा गया था। प्रोजेक्ट के तहत सड़कों पर लावारिस पशुओं को गोशाला तक पहुंचाने के लिए प्राइवेट तौर पर कैचर, गोशाला, ट्रांसपोर्ट, मेडिकल और रूटीन में उनका चेकअप करने के लिए डॉक्टरों की नियुक्ति शामिल थी। शुरुआत में मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने प्रोजेक्ट पर दिलचस्पी दिखाई, लेकिन डेढ़ साल से फाइल मुख्यमंत्री दफ्तर की धूल चाट रही है। दूसरी तरफ बोर्ड के लिए फंड और तमाम निर्णय तथा नोटीफिकेशन के लिए बोर्ड असहज दिखने लगा तो पंजाब सरकार ने अन्य राज्यों की तरह बोर्ड का विघटन कर आयोग बना दिया। उसका चेयरमैन आज तक नहीं बनाया।
कीमती भगत ने कहा कि आयोग के गठन से गो हत्याओं से लेकर उनके संरक्षण की समस्याएं हल हो सकती हैं और उनके रखरखाव को फंड भी मिल सकेगा। उन्होंने माना की आयोग के चेयरमैन और प्रोजेक्ट को लेकर थोड़ी देरी हो चुकी है, लेकिन वह मुख्यमंत्री के संपर्क में हैं और जल्द ही उस पर कोई फैसला होने की उम्मीद है। गो रक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश ने कहा कि सरकार की ढीली नीति के कारण प्रदेश में गायों पर अत्याचार और उनकी तस्करी से लेकर कटाई हो रही है। सरकार ने गाय की रक्षा का आश्वासन दिया है और हाईकोर्ट ने भी सरकार को हिदायत दी है।

गोचरांद को पंजाब में दस हजार एकड़ जमीन
गो सेवा बोर्ड के पूर्व चेयरमैन कीमती भगत ने कहा कि पूरे पंजाब में गोचरांद और गोशाला की जमीनों पर भू माफिया का कब्जा है। सरकार से गोचरांद भूमि को कब्जा मुक्त करवाने की मांग की है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार की ओर से सूबे में गोचर एक्ट लाया जा रहा है। इसके लिए पूर्व मंत्री तीक्षण सूद के नेतृत्व में कमेटी का गठन किया गया है। भगत ने बताया कि सभी जिलों से मिली गोचर की रिपोर्ट में 10 हजार एकड़ जमीन निकली है। कपूथरला में 1138 एकड़, पटियाला में 806 एकड़, गुरदासपुर में 190 एकड़, होशियारपुर में 1383 एकड़, फिरोजपुर में 102 एकड़, मानसा में 813 एकड़ जमीन गोचरांद के लिए है जिस पर कब्जे हो रखे हैं। उन्होंने बताया कि पुरातन काल से गोचरांद के नाम पर जमीन छोड़ी जा रही है, उसे कब्जों से छुड़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समस्या का हल उपद्रव फैलाने से नहीं है, बल्कि उसका हल ढूंढने से भी है। उन्होंने कहा कि वह बंद का विरोध नहीं करते हैं, लेकिन हर संस्था का कार्य करने का तरीका होता है और उसके अनुसार ही निर्णय लिए जाते हैं। इस मौके पर गो रक्षा दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सतीश, महासचिव गुरप्रीत सिंह, शिवसेना बाल ठाकरे के प्रदेश अध्यक्ष योगराज शर्मा और उपाध्यक्ष हरीश सिंगला मौजूद रहे।

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