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मरीजों को रेफर करने पर हंगामा
पठानकोट।
Updated Sun, 11 May 2014 10:14 PM IST
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सिविल अस्पताल से मरीजों को रेफर करने के नाम पर पठानकोट विकास मंच के कार्यकर्ताओं ने यहां के स्वास्थ्य कर्मियों पर मोटी कमाई करने का आरोप लगाया है। रविवार को मामले को लेकर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में जमकर हंगामा हुआ।
विकास मंच के कार्यकर्ताओं की इसे लेकर स्वास्थ्य कर्मियों के साथ नोकझोंक हुई। मंच के सदस्यों ने आरोप लगाया कि अस्पताल के कर्मी मिलीभगत करके मरीजों को जानबूझकर रेफरकर मोटी कमाई कर रहे हैं। उधर, अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच कराने का फैसला किया है।
मंच के चेयरमैन नरेंद्र काला व अध्यक्ष आदेश सयाल ने बताया कि सुजानपुर के पास दुर्घटना में जयपुर के घायल मरीजों में से तीन को छह गुणा अधिक पैसे एंठ कर प्राइवेट एंबुलेंस से शहर के ही एक निजी अस्पताल में अमृतसर रेफर करने के नाम पर भर्ती कराया गया है।
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उन्होंने कहा कि शहर की एक सामाजिक संस्था की ओर से एंबुलेंस वेन सिविल अस्पताल में गत माह से सेवाएं प्रदान कराने के लिए उपलब्ध है। जबकि वैन के मालिक अस्पताल के ही मुलाजिम हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इमरजेंसी वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों को डाक्टरों की अनुमति के बगैर रेफर कर मनचाहे प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती कराया जाता है।
इसमें सरकारी एंबुलेंस की बजाए प्राइवेट एंबुलेंस दौड़ाई जा रही है। जोकि मरीजों को तीन किलोमीटर तक ले जाने के लिए 200 रुपये की बजाय 1300 रुपये वसूल कर रही है। उन्होंने बताया कि सुजानपुर के पास हादसे में घायलों ने संस्था को उक्त जानकारी दी है।
सदस्यों ने कहा कि मामले की शिकायत सेहत मंत्री और डीसी से की जाएगी। इस बारे में सरकारी एंबुलेंस के चालक जयदीप सिंह ने बताया कि जब मरीजों को बाहरी अस्पताल के लिए ले जाया गया, तब वह मौके पर इमरजेंसी वार्ड में मौजूद थे, लेकिन ड्यूटी में तैनात कर्मियों ने सरकारी एंबुलेंस को इस्तेमाल में लाना उचित नहीं समझा गया। सिविल अस्पताल के हड्डी विशेषज्ञ व डीएमसी पठानकोट डा. तरसेम सिंह और विजय जमवाल ने भी माना कि मरीजों को रेफर करने का मामला उनके संज्ञान में नही है।
डा.तरसेम सिंह ने बताया कि मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी। उधर, कार्यकारी एसएमओ डा.भूपेंद्र सिंह ने कहा है कि अब न तो कोई प्राइवेट या संस्था की एंबुलेंस अस्पताल में पार्क होगी, न ही अस्पताल के उच्चाअधिकारियों की मंजूरी के बगैर कोई मरीज रेफर होगा।
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विकास मंच के कार्यकर्ताओं की इसे लेकर स्वास्थ्य कर्मियों के साथ नोकझोंक हुई। मंच के सदस्यों ने आरोप लगाया कि अस्पताल के कर्मी मिलीभगत करके मरीजों को जानबूझकर रेफरकर मोटी कमाई कर रहे हैं। उधर, अस्पताल प्रशासन ने मामले की जांच कराने का फैसला किया है।
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मंच के चेयरमैन नरेंद्र काला व अध्यक्ष आदेश सयाल ने बताया कि सुजानपुर के पास दुर्घटना में जयपुर के घायल मरीजों में से तीन को छह गुणा अधिक पैसे एंठ कर प्राइवेट एंबुलेंस से शहर के ही एक निजी अस्पताल में अमृतसर रेफर करने के नाम पर भर्ती कराया गया है।
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उन्होंने कहा कि शहर की एक सामाजिक संस्था की ओर से एंबुलेंस वेन सिविल अस्पताल में गत माह से सेवाएं प्रदान कराने के लिए उपलब्ध है। जबकि वैन के मालिक अस्पताल के ही मुलाजिम हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इमरजेंसी वार्ड में भर्ती होने वाले मरीजों को डाक्टरों की अनुमति के बगैर रेफर कर मनचाहे प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती कराया जाता है।
इसमें सरकारी एंबुलेंस की बजाए प्राइवेट एंबुलेंस दौड़ाई जा रही है। जोकि मरीजों को तीन किलोमीटर तक ले जाने के लिए 200 रुपये की बजाय 1300 रुपये वसूल कर रही है। उन्होंने बताया कि सुजानपुर के पास हादसे में घायलों ने संस्था को उक्त जानकारी दी है।
सदस्यों ने कहा कि मामले की शिकायत सेहत मंत्री और डीसी से की जाएगी। इस बारे में सरकारी एंबुलेंस के चालक जयदीप सिंह ने बताया कि जब मरीजों को बाहरी अस्पताल के लिए ले जाया गया, तब वह मौके पर इमरजेंसी वार्ड में मौजूद थे, लेकिन ड्यूटी में तैनात कर्मियों ने सरकारी एंबुलेंस को इस्तेमाल में लाना उचित नहीं समझा गया। सिविल अस्पताल के हड्डी विशेषज्ञ व डीएमसी पठानकोट डा. तरसेम सिंह और विजय जमवाल ने भी माना कि मरीजों को रेफर करने का मामला उनके संज्ञान में नही है।
डा.तरसेम सिंह ने बताया कि मामले की जांच कर कार्रवाई की जाएगी। उधर, कार्यकारी एसएमओ डा.भूपेंद्र सिंह ने कहा है कि अब न तो कोई प्राइवेट या संस्था की एंबुलेंस अस्पताल में पार्क होगी, न ही अस्पताल के उच्चाअधिकारियों की मंजूरी के बगैर कोई मरीज रेफर होगा।