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उपचारधीन कैदी ने दम तोड़ा
अमर उजाला, पठानकोट
Updated Thu, 30 Jan 2014 10:41 PM IST
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गुरदासपुर जेल में नशे की ओवरडोज से हालत बिगड़ने पर पठानकोट सिविल अस्पताल में भर्ती विचाराधीन कैदी ने वीरवार को उपचार के दौरान दम तोड़ दिया।
उसे करीब बीस दिन पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अधिक नशा लेने के कारण उसके ज्यादातर अंग खराब हो चुके थे।
उसका शरीर भी नीला पड़ चुका था। कैदी के परिजनों ने जेल प्रशासन पर जेल में नशा देने का आरोप लगाया था। मृतक के परिजनों ने उसकी मौत का जिम्मेदार जेल प्रशासन को ठहराया है।
मृतक की बहनों ने आरोप लगाया कि गुरदासपुर जेल में कैदियों को नशे का आदि बनाया जा रहा है। जेल जाने से पहले उनका भाई नशे का आदि नहीं था लेकिन जेल में उसे नशे की लत लग गई।
कैदी आठ माह से गुरदासपुर जेल में बंद था। इसी दौरान उसने जेल में खूब नशा किया। उसकी हालत इतनी बिगड़ गई कि उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
वहीं, अपने अन्य कैदी साथियों के साथ मिलकर एक ही इंजेक्शन का बार-बार प्रयोग करने पर वह एचआईवी पॉजिटिव भी हो गया।
बहनों ने बताया कि उसके भाई ने उन्हें बताया था कि जेल के अंदर ही उसे मेडिकल नशा मुहैया हो जाता था। जेल के अंदर ही मौजूद मुलाजिम पैसे लेकर कैदियों को किसी भी तरह का नशा जेल में उपलब्ध करवा देते हैं।
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मृतक की बहनों ने प्रदेश सरकार से मांग करते हुए कहा कि जेल के अंदर हो रहे नशे के कारोबार पर रोक लगाई जाए ताकि दूसरा कोई व्यक्ति इस तरह के हादसे का शिकार न हो।
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उसे करीब बीस दिन पहले अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अधिक नशा लेने के कारण उसके ज्यादातर अंग खराब हो चुके थे।
उसका शरीर भी नीला पड़ चुका था। कैदी के परिजनों ने जेल प्रशासन पर जेल में नशा देने का आरोप लगाया था। मृतक के परिजनों ने उसकी मौत का जिम्मेदार जेल प्रशासन को ठहराया है।
मृतक की बहनों ने आरोप लगाया कि गुरदासपुर जेल में कैदियों को नशे का आदि बनाया जा रहा है। जेल जाने से पहले उनका भाई नशे का आदि नहीं था लेकिन जेल में उसे नशे की लत लग गई।
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कैदी आठ माह से गुरदासपुर जेल में बंद था। इसी दौरान उसने जेल में खूब नशा किया। उसकी हालत इतनी बिगड़ गई कि उसे अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।
वहीं, अपने अन्य कैदी साथियों के साथ मिलकर एक ही इंजेक्शन का बार-बार प्रयोग करने पर वह एचआईवी पॉजिटिव भी हो गया।
बहनों ने बताया कि उसके भाई ने उन्हें बताया था कि जेल के अंदर ही उसे मेडिकल नशा मुहैया हो जाता था। जेल के अंदर ही मौजूद मुलाजिम पैसे लेकर कैदियों को किसी भी तरह का नशा जेल में उपलब्ध करवा देते हैं।
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मृतक की बहनों ने प्रदेश सरकार से मांग करते हुए कहा कि जेल के अंदर हो रहे नशे के कारोबार पर रोक लगाई जाए ताकि दूसरा कोई व्यक्ति इस तरह के हादसे का शिकार न हो।