फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Punjab ›   Pathankot News ›   Hospital birth, childhood bloody prison

जन्म अस्पताल में, बचपन कटेगा जेल में

Sat, 21 Sep 2013 10:48 PM IST
गुरदासपुर
गुरदासपुर Updated Sat, 21 Sep 2013 10:48 PM IST
विज्ञापन
Hospital birth, childhood bloody prison
वंश को आगे बढ़ाने के लिए बेटे की चाहत रखने वाले लोग मंदिर और गुरुद्वारों में माथा टेकते और मन्नत मांगते अक्सर नजर आते हैं।
विज्ञापन


मगर टीना एक ऐसी बदनसीब मां है, जिसने सरकारी अस्पताल में पुलिस की देखरेख में पुत्र को जन्म तो दिया, मगर इस नवजात की न तो कोई सुध लेने वाला था और न ही कोई उसके जन्म पर खुशी मनाने वाला।

पैदा हुए इस बच्चे को बदनसीब न कहें तो क्या कहें, क्योंकि जन्म लेने के बाद जब वह पहली बार अपनी मां के आंचल से बाहर निकलेगा तो खेलने के लिए कोई खेल का मैदान नहीं बल्कि केंद्रीय जेल गुरदासपुर का आंगन होगा।
विज्ञापन

जानकारी के अनुसार सरकारी अस्पताल गुरदासपुर की ट्रायल वार्ड में दाखिल महिला कैदी टीना तीन माह से केंद्रीय जेल गुरदासपुर में 250 ग्राम नशीले पाउडर बरामद होने को लेकर विचारधीन कैदी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


जब पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया तब वह गर्भ से थी। जिसको समय पूरा होने पर जेल प्रशासन ने प्रसव के लिए सरकारी अस्पताल में दाखिल करवाया।

अस्पताल में शुक्रवार देर शाम उक्त महिला ने एक बच्चे (लड़के) को जन्म दिया लेकिन जन्म लेने वाले बच्चे के नसीब देखो कि जन्म के बाद वह भी अपनी मां के साथ जेल में सजा काटेगा हालांकि टीना का दूसरा बच्चा अरुण जिसकी आयु डेढ़ साल है, वह भी अपनी मां के साथ जेल में समय बिता रहा है।

टीना ने बताया कि दो साल पहले बिहार में बाढ़ आने के  कारण उसका सब कुछ तबाह हो गया था जिस कारण वह पंजाब के जिला लुधियाना में भीख मांगकर अपने बच्चे का पेट भरने लगी।

लुधियाना के बाद वह नए बने जिला पठानकोट में करीब एक साल से रह रही थी। टीना ने बताया कि वह रोजाना की तरह भीख मांग रही थी कि उसको पठानकोट डिवीजन नंबर-2 की पुलिस ने उस पर 250 ग्राम नशीला पाउडर बरामद होने का मामला दर्ज किया।

अस्पताल में दाखिल टीना ने अपनी आपबीती सुनाते बताया कि पुलिस ने उसकी सगी बहन मुन्नी के खिलाफ भी 200 ग्राम नशीला पाउडर का मामला दर्ज किया।

अब वे दोनों बहनें जेल गुरदासपुर में तीन माह से सजा काट रही हैं। दुख की बात यह भी है कि गरीब तथा प्रवासी होने के कारण वह अपनी कानूनी लड़ाई भी नहीं लड़ सकती।

आखिर कौन संवारेगा बच्चों का भविष्य
इस  समय केंद्रीय जेल में 10 से 12 के बीच कुछ ऐसे बच्चें हैं, जिनकी आयु छोटी होने के कारण वे अपनी मां के साथ ही बेगुनाह होने के बावजूद रह रहे हैं। जिस बच्चे का जन्म ही जेल में हुआ हो, उस बच्चे के लिए आगे जाकर समाज का सामना करना मुश्किल होगा। सरकार द्वारा जेलों में बंद बच्चों की पढ़ाई संबंधी भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा।

स्टाफ ने नहीं ली महिला कैदी की सुध
सिविल सर्जन को सूचित किए जाने के बाद सिर्फ एक  महिला नर्स ने आकर पीड़ित महिला की सुध ली। हालांकि देर शाम तक नवजात की देखरेख के लिए कोई भी बच्चों का माहिर डॉक्टर नहीं आया। अस्पताल में दाखिल होने वाली प्रत्येक गर्भवती महिला को सरकार की ओर से 100 रुपये की रोजाना फीड भी मुहैया करवाई जाती है  जबकि अस्पताल की ट्रायल वार्ड में दाखिल टीना को देर शाम खबर लिखे जाने तक सरकारी अस्पताल द्वारा कुछ भी खाने के लिए नहीं दिया गया।


क्या कहते है केंद्रीय जेल अधिकारी
केंद्रीय जेल के सीनियर अधिकारी सुरिंदर सिंह सैनी ने बताया कि इस समय केंद्रीय जेल गुरदासपुर में 10 से अधिक बच्चे अपने पारिवारिक सदस्यों के साथ बंद हैं। अगर इन बच्चों को कोई तकलीफ होती है तो सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों के साथ तुरंत संपर्क किया जाता है। बच्चों का पूरा ध्यान रखा जाता है। नवजात बच्चे के संबंध में उन्होंने कहा कि अगर बच्चे को कोई समस्या पेश आती है तो सरकारी अस्पताल के माहिर डॉक्टरों से उसका चेकअप करवाया जाएगा। जेल में पक्के तौर पर एक फार्मासिस्ट की ड्यूटी भी होती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed