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बासमती की फसल पर रोगों के प्रकोप का खतरा
गुरदासपुर ।
Updated Wed, 09 Jul 2014 10:47 PM IST
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बासमती की फसल की पैदावार पर रोगों का कहर असर छोड़ सकता है। फसल पर रोगों के प्रकोप की रोकथाम के लिए यदि समय रहते कीटनाशक रसायनों का प्रयोग नहीं किया गया तो निश्चित रूप से फसल की उपज पर इसका बुरा असर पड़ेगा। यह विचार मुख्य कृषि अधिकार डा.रवि कुमार सभ्रवाल के हैं।
वे नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट मुंबई व कृषि विभाग गुरदासपुर के सहयोग से गांव लोलेनंगल में आयोजित कैंप के दौरान बोल रह थे। इसमें कृषि विकास अधिकारी डा.अमरीक सिंह व डा.सुखप्रीत सिंह भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में किसानों को बासमती की फसल की बेहतर उपज के लिए जानकारियों देने की मंशा से प्रदर्शनी भी लगाई गई।
इसमें किसानों को बासमती की फसल में रोगों के प्रकोप के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही उनके रोकथाम के उपाय भी बताए गए। कार्यक्रम में किसानों को कृषि उपयोगी साहित्य भी वितरित किए गए। डा.रवि कुमार सभ्रवाल ने बताया कि पानी का स्तर निरंतर नीचे जा रहा है।
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इस समय जरूरत इस बात की है कि धान की काश्त करने की विधि को विज्ञानिक तकनीक से जोड़ा जाय। ऐसा करने से कृषि पर लागत कम आएगी और पैदावार बढ़ेगी। अंत में सरपंच राकेश कुमार शर्मा ने भी किसानों को वैज्ञानिक सोच के साथ खेती के लिए प्रेरित किया।
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वे नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट मुंबई व कृषि विभाग गुरदासपुर के सहयोग से गांव लोलेनंगल में आयोजित कैंप के दौरान बोल रह थे। इसमें कृषि विकास अधिकारी डा.अमरीक सिंह व डा.सुखप्रीत सिंह भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में किसानों को बासमती की फसल की बेहतर उपज के लिए जानकारियों देने की मंशा से प्रदर्शनी भी लगाई गई।
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इसमें किसानों को बासमती की फसल में रोगों के प्रकोप के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही उनके रोकथाम के उपाय भी बताए गए। कार्यक्रम में किसानों को कृषि उपयोगी साहित्य भी वितरित किए गए। डा.रवि कुमार सभ्रवाल ने बताया कि पानी का स्तर निरंतर नीचे जा रहा है।
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इस समय जरूरत इस बात की है कि धान की काश्त करने की विधि को विज्ञानिक तकनीक से जोड़ा जाय। ऐसा करने से कृषि पर लागत कम आएगी और पैदावार बढ़ेगी। अंत में सरपंच राकेश कुमार शर्मा ने भी किसानों को वैज्ञानिक सोच के साथ खेती के लिए प्रेरित किया।