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बाजवा की कम मौजूदगी पर उठे सवाल
पठानकोट।
Updated Thu, 17 Apr 2014 10:31 PM IST
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लोकसभा चुनाव के दौर में उम्मीदवारों का प्रचार अभियान जोर पकड़ चुका है, लेकिन गुरदासपुर लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी व पंजाब प्रधान प्रताप बाजवा की अपने ही क्षेत्र में अपेक्षाकृत कम मौजूदगी पार्टी के समर्थकों को नागवार गुजर रही है। ऐसे में विपक्षीय दल खास कर भाजपा और आम आदमी पार्टी मौके का फायदा उठाने की कोशिश में हैं।
गैरकांग्रेसियों की ओर से यह विषय एक मुद्दे के तौर पर उठाया जा रहा है कि बाजवा अपने क्षेत्र के लोगों को ही समय नहीं दे पा रहे हैं। हालांकि बाजवा की ओर से ऐसी बातों को निराधार करार दिया गया है। भले ही बाजवा की कम मौजूदगी लोगों को खटक रही हो, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि बाजवा ने खास रणनीति के तहत पत्नी विधायक चरणजीत कौर बाजवा और बेटे विक्रम सिंह बाजवा को अपने क्षेत्र में प्रचार के लिए पूरा समय देने की जिम्मेदारी सौंपी है।
उल्लेखनीय है कि पिछले पांच साल सांसद होने के बावजूद बाजवा का पठानकोट से दूरी बनाए रखना पार्टी के नेताओं की नाराजगी की वजह बना। हालांकि अब बाजवा नाराज नेताओं को मनाने की जुगत में लगे हुए हैं। फिर भी वर्करों की नाराजगी अभी कम होने का नाम नहीं ले रही है। वर्करों की बैठकों में लगातार यह बात उठाई जा रही है। ऐसे में हर बार बाजवा की ओर से इस मामले में खुद का बचाव किया जा रहा है।
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पिछले दिनों कांग्रेसी नेता गोपाल महाजन और पूर्व मंत्री रमन भल्ला के आवास पर भी वर्करों ने उनकी गैर मौजूदगी पर कोआर्डिनेटर के सामने अपना गुस्सा जाहिर किया था। उधर, भाजपा प्रत्याशी व सिने स्टार विनोद खन्ना कहते हैं कि दिल्ली की पार्टियों से बाजवा को फुर्रस्त मिले तो हल्के की स्थिति उन्हें दिखे। दूसरी तरफ प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि कुछ कमियां जरूरी रही हैं, लेकिन स्थिति उनके नियंत्रण में है। मौका मिला तो गुरदासपुर में विकास की आंधी लाई जाएगी(
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गैरकांग्रेसियों की ओर से यह विषय एक मुद्दे के तौर पर उठाया जा रहा है कि बाजवा अपने क्षेत्र के लोगों को ही समय नहीं दे पा रहे हैं। हालांकि बाजवा की ओर से ऐसी बातों को निराधार करार दिया गया है। भले ही बाजवा की कम मौजूदगी लोगों को खटक रही हो, लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि बाजवा ने खास रणनीति के तहत पत्नी विधायक चरणजीत कौर बाजवा और बेटे विक्रम सिंह बाजवा को अपने क्षेत्र में प्रचार के लिए पूरा समय देने की जिम्मेदारी सौंपी है।
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उल्लेखनीय है कि पिछले पांच साल सांसद होने के बावजूद बाजवा का पठानकोट से दूरी बनाए रखना पार्टी के नेताओं की नाराजगी की वजह बना। हालांकि अब बाजवा नाराज नेताओं को मनाने की जुगत में लगे हुए हैं। फिर भी वर्करों की नाराजगी अभी कम होने का नाम नहीं ले रही है। वर्करों की बैठकों में लगातार यह बात उठाई जा रही है। ऐसे में हर बार बाजवा की ओर से इस मामले में खुद का बचाव किया जा रहा है।
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पिछले दिनों कांग्रेसी नेता गोपाल महाजन और पूर्व मंत्री रमन भल्ला के आवास पर भी वर्करों ने उनकी गैर मौजूदगी पर कोआर्डिनेटर के सामने अपना गुस्सा जाहिर किया था। उधर, भाजपा प्रत्याशी व सिने स्टार विनोद खन्ना कहते हैं कि दिल्ली की पार्टियों से बाजवा को फुर्रस्त मिले तो हल्के की स्थिति उन्हें दिखे। दूसरी तरफ प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि कुछ कमियां जरूरी रही हैं, लेकिन स्थिति उनके नियंत्रण में है। मौका मिला तो गुरदासपुर में विकास की आंधी लाई जाएगी(