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‘वो लाहौर’ में दिखा दर्द और लालच
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
Updated Sun, 13 Mar 2016 08:58 PM IST
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लुधियाना में नाटक का मंचन करते कलाकार
- फोटो : अमर उजाला
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द फिल्म एंड थिएटर सोसाइटी की ओर से भारत के मध्यकाल की कहानी पर बनाए नाटक ‘वो लाहौर’ का मंचन गुरु नानक देव भवन में किया गया। नाटक में विभाजन का दर्द, परिवार में लालच दिखाया गया। साथ ही यह दर्शाया गया कि किस प्रकार सभी अपने अपने बारे में सोचते हैं और कोई परिवार के बारे में नहीं सोचता।
नाटक भारत-पाक बंटवारे के अलावा एक आम हिंदुस्तानी महिला पर आधारित है जो भारत के स्वाधीनता संग्राम के बीच में सामाजिक उथल पुथल और आशाओं के बीच अपने परिवार को एक साथ रखने का प्रयास करती है। नाटक में भारत-पाक के बंटवारे को देख दर्शक भावुक हो उठे। नाटक का मंचन करने वाले डायरेक्टर और राइटल अतुल सत्य कौशिक अपने नाटक को पाकिस्तान में भी दिखाना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि बंटवारे के समय दोनों ही मुल्कों ने एक समान दर्द सहा है। नाटक पाकिस्तान की भूमि से शुरू होता है। जमुना नामक विधवा के तीन बेटे दीना, सूरज और बिज्जू होते हैं। आजादी से पहले बड़ा बेटा दीना सरकारी नौकरी करता है। उससे छोटा बेटा सूरज क्रांतिकारी होता है और सबसे छोटा बिज्जू दिव्यांग होता है। सूरज कोठे पर जाना शुरू कर देता है और कुछ समय बाद एक लड़की को पत्नी बनाकर घर ले आता है।
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सारा परिवार उसका विरोध करता है, क्योंकि वह लड़की मुसलमान समुदाय की होती है। उसी समय सरकार घोषणा करती है कि क्रांतिकारियों का पता देने वालों को इनाम दिया जाएगा। यह सुनकर दीना के दिल में लालच आ जाता है। वह अंग्रेज सरकार को सूरज के बारे में जानकारी दे देता है। इसके बाद भारत दो भागों में बंट जाता है। आधा परिवार भारत और आधा परिवार पाकिस्तान में बिछड़ जाता है।
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नाटक भारत-पाक बंटवारे के अलावा एक आम हिंदुस्तानी महिला पर आधारित है जो भारत के स्वाधीनता संग्राम के बीच में सामाजिक उथल पुथल और आशाओं के बीच अपने परिवार को एक साथ रखने का प्रयास करती है। नाटक में भारत-पाक के बंटवारे को देख दर्शक भावुक हो उठे। नाटक का मंचन करने वाले डायरेक्टर और राइटल अतुल सत्य कौशिक अपने नाटक को पाकिस्तान में भी दिखाना चाहते हैं।
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उन्होंने कहा कि बंटवारे के समय दोनों ही मुल्कों ने एक समान दर्द सहा है। नाटक पाकिस्तान की भूमि से शुरू होता है। जमुना नामक विधवा के तीन बेटे दीना, सूरज और बिज्जू होते हैं। आजादी से पहले बड़ा बेटा दीना सरकारी नौकरी करता है। उससे छोटा बेटा सूरज क्रांतिकारी होता है और सबसे छोटा बिज्जू दिव्यांग होता है। सूरज कोठे पर जाना शुरू कर देता है और कुछ समय बाद एक लड़की को पत्नी बनाकर घर ले आता है।
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सारा परिवार उसका विरोध करता है, क्योंकि वह लड़की मुसलमान समुदाय की होती है। उसी समय सरकार घोषणा करती है कि क्रांतिकारियों का पता देने वालों को इनाम दिया जाएगा। यह सुनकर दीना के दिल में लालच आ जाता है। वह अंग्रेज सरकार को सूरज के बारे में जानकारी दे देता है। इसके बाद भारत दो भागों में बंट जाता है। आधा परिवार भारत और आधा परिवार पाकिस्तान में बिछड़ जाता है।