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धार्मिक डेरे की जमीन की कमाई पर तनाव
ब्यूरो/अमर उजाला, मोगा
Updated Mon, 21 Dec 2015 02:27 PM IST
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गांव पंजगराई खुर्द में गद्दी नशीन डेरा बाबा भगवान दास की 54 एकड़ मालकी जमीन की कमाई पर पंचायत एवं डेरा प्रमुख के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है। थाना समालसर के प्रमुख इंस्पेक्टर गुरप्यार सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में पुलिस मौके पर पहुंचने पर टकराव होने से बच गया।
डीएसपी बाघापुराना जसपाल सिंह ढिल्लों ने पंचायत के आरोपों को नकारा है। उन्होंने कहा कि पुलिस को किसी व्यक्ति की तरफ से डेरे की जमीन पर कब्जा करने की जानकारी मिली थी, जो मात्र अफवाह थी। उन्होंने कहा कि पुलिस सावधानी के तौर पर ही गांव में गई थी।
सरपंच बलदेव सिंह ने पुलिस पर गांव का माहौल खराब करने के अलावा डेरा प्रमुख को शह देने का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि उनके गांव में डेरा बाबा भगवान दास की 54 एकड़ मालकी जमीन है। इस डेरे के पहले प्रमुख अर्जुन मुनि की बीती 20 अगस्त को मौत के बाद 6 सितंबर को उनके भतीजे सुंदर दास (राम सिंह) को पगड़ी देकर महंत नियुक्त कर दिया था।
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उन्होंने आरोप लगाया कि डेरे की मालकी वाली जमीन से होती आमदन खुर्द बुर्द की जा रही है। उन्हाेंने कहा कि इतनी जमीन होने के बावजूद डेरे पर तकरीबन 15 लाख रुपये का कर्ज चढ़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि पंचायत ने नए नियुक्त किए महंत सुंदर दास से प्रबंधकी कमेटी बनाने के लिए संपर्क किया तो उसने पंचायत को बुरा भला कहते प्रबंधकी कमेटी से साफ इंकार कर दिया।
पंचायत चाहती थी कि डेरे की जमीनी कमाई से डेरे की नई इमारत व अन्य समाज भलाई के काम शुरू किए जाएं। उन्हाेंने कहा कि इससे पंचायत ने 26 सितंबर को महंत सुंदर दास को गद्दी से उतार दिया। उन्होंने बताया कि इस दौरान एक अन्य महंत दर्शन दास ने पंचायत के पास दावा जताया कि पहले डेरा प्रमुख अर्जुन मुनि उसे जीते गद्दी (महंती) दे दी थी।
उन्होंने कहा कि पंचायत दर्शन दास के पक्ष में है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डेरे के महंत सुंदर दास और उसके समर्थकों ने पंचायत पर अमन कानून भंग करने की एसडीएम के पास शिकायत कर दी। इसमें महिला पंचों का नाम भी लिखवा दिया गया, जबकि महिला पंच ने किसी काम में कोई दखल नहीं दिया।
इस बारे में मौजूदा डेरा प्रमुख सुंदर दास ने दावा किया कि गद्दी नशीन डेरा बाबा भगवान दास की संपत्ति में पंचायत कानूनी तौर पर दखल नहीं के सकती। उन्होंने बताया कि पहले डेरा प्रमुख अर्जुन मुनि की मौत बाद उन्हें पंचायत की हाजिरी में संत समाज ने गद्दी (महंती) दे दी थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि राजस्व विभाग ने भी उनके पक्ष में लिख दिया है।
उन्होंने बताया कि इस डेरे के नाम की जमीन की मालकी बारे काफी लंबे समय से अदालत में केस चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ गलत लोग जालसाजी से डेरे की जमीन हड़पने के लिए महंत होने का दावा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसका न्याय अदालत में होना है।
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डीएसपी बाघापुराना जसपाल सिंह ढिल्लों ने पंचायत के आरोपों को नकारा है। उन्होंने कहा कि पुलिस को किसी व्यक्ति की तरफ से डेरे की जमीन पर कब्जा करने की जानकारी मिली थी, जो मात्र अफवाह थी। उन्होंने कहा कि पुलिस सावधानी के तौर पर ही गांव में गई थी।
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सरपंच बलदेव सिंह ने पुलिस पर गांव का माहौल खराब करने के अलावा डेरा प्रमुख को शह देने का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि उनके गांव में डेरा बाबा भगवान दास की 54 एकड़ मालकी जमीन है। इस डेरे के पहले प्रमुख अर्जुन मुनि की बीती 20 अगस्त को मौत के बाद 6 सितंबर को उनके भतीजे सुंदर दास (राम सिंह) को पगड़ी देकर महंत नियुक्त कर दिया था।
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उन्होंने आरोप लगाया कि डेरे की मालकी वाली जमीन से होती आमदन खुर्द बुर्द की जा रही है। उन्हाेंने कहा कि इतनी जमीन होने के बावजूद डेरे पर तकरीबन 15 लाख रुपये का कर्ज चढ़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि पंचायत ने नए नियुक्त किए महंत सुंदर दास से प्रबंधकी कमेटी बनाने के लिए संपर्क किया तो उसने पंचायत को बुरा भला कहते प्रबंधकी कमेटी से साफ इंकार कर दिया।
पंचायत चाहती थी कि डेरे की जमीनी कमाई से डेरे की नई इमारत व अन्य समाज भलाई के काम शुरू किए जाएं। उन्हाेंने कहा कि इससे पंचायत ने 26 सितंबर को महंत सुंदर दास को गद्दी से उतार दिया। उन्होंने बताया कि इस दौरान एक अन्य महंत दर्शन दास ने पंचायत के पास दावा जताया कि पहले डेरा प्रमुख अर्जुन मुनि उसे जीते गद्दी (महंती) दे दी थी।
उन्होंने कहा कि पंचायत दर्शन दास के पक्ष में है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डेरे के महंत सुंदर दास और उसके समर्थकों ने पंचायत पर अमन कानून भंग करने की एसडीएम के पास शिकायत कर दी। इसमें महिला पंचों का नाम भी लिखवा दिया गया, जबकि महिला पंच ने किसी काम में कोई दखल नहीं दिया।
इस बारे में मौजूदा डेरा प्रमुख सुंदर दास ने दावा किया कि गद्दी नशीन डेरा बाबा भगवान दास की संपत्ति में पंचायत कानूनी तौर पर दखल नहीं के सकती। उन्होंने बताया कि पहले डेरा प्रमुख अर्जुन मुनि की मौत बाद उन्हें पंचायत की हाजिरी में संत समाज ने गद्दी (महंती) दे दी थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि राजस्व विभाग ने भी उनके पक्ष में लिख दिया है।
उन्होंने बताया कि इस डेरे के नाम की जमीन की मालकी बारे काफी लंबे समय से अदालत में केस चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ गलत लोग जालसाजी से डेरे की जमीन हड़पने के लिए महंत होने का दावा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसका न्याय अदालत में होना है।