{"_id":"97-40735","slug":"Firozpur-40735-97","type":"story","status":"publish","title_hn":"महिलाओं के सिर पर गांव को बचाने का जिम्मा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महिलाओं के सिर पर गांव को बचाने का जिम्मा
Firozpur
Updated Sun, 25 Aug 2013 05:35 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अबोहर (फिरोजपुर)। सैय्यदवाला के पूर्व सरपंच मूलचंद के पुत्र रामेश्वर ने बताया कि लंबी के किसान सेम का पानी अबुलखुराना ड्रेन में छोड़ रहे हैं। इस कारण यहां 2011 जैसी स्थिति बन गई है। गांव की करीब 2 हजार एकड़ नरमे की फसल व बाग तबाह हो गए हैं। पानी का स्तर लगातार बढ़ रहा है। कई घरों की दीवारों में दरारें आ गई हैं। लोग मकान छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर चले गए हैं। उन्हाेंने बताया कि पिछले दिनों नाले का किनारा दो स्थानों से टूट गया और पानी का बहाव गांव खुईयां सरवर की ओर हो गया था, लेकिन प्रशासन ने टूटे किनारों को बंधवा दिया। इस दौरान पुलिस प्रशासन और लोगाें के बीच हुई झड़प को लेकर ही पुलिस ने गांव के 80 लोगों पर धारा 307 आदि में मामला दर्ज किया है। पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के लिए लोग फरार हैं और महिलाएं अपने घराें की सुरक्षा कर रही हैं।
गांववासियों आत्माराम, रक्षपाल, ओम प्रकाश, पृथ्वीराज और प्रभुदयाल आदि ने बताया कि लोग अपने खर्च पर ट्रालियों से मिट्टी डलवाकर घरों को बचाने में लगे हैं। गांव के नरेगा मजदूर जान जोखिम में डालकर मिट्टी के थैले दूसरी ओर पहुंचाने के लिए टायर ट्यूबों का किश्ती के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। बोरियाें में मिट्टी भरकर नाले के किनारे पर लगाई जा रही है, लेकिन फिर भी पानी का बहाव गांव की ओर बढ़ रहा है। यहां की महिलाओं ने प्रशासन से मांग की है कि गांव के लोगाें पर दर्ज किए मामले रद्द करते हुए उनके गांव को डूबने से बचाया जाए। महिलाआें ने बताया कि उनकी फसलें तो तबाह हो चुकी हैं, अगर बाढ़ से उनके मकान भी गिर गए तो उनके परिवार पूरी तरह से तबाह हो जाएंगे। सूर्य छिपते ही इस गांव में धारा 144 लागू हो जाती है।
विज्ञापन
गांववासियों आत्माराम, रक्षपाल, ओम प्रकाश, पृथ्वीराज और प्रभुदयाल आदि ने बताया कि लोग अपने खर्च पर ट्रालियों से मिट्टी डलवाकर घरों को बचाने में लगे हैं। गांव के नरेगा मजदूर जान जोखिम में डालकर मिट्टी के थैले दूसरी ओर पहुंचाने के लिए टायर ट्यूबों का किश्ती के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। बोरियाें में मिट्टी भरकर नाले के किनारे पर लगाई जा रही है, लेकिन फिर भी पानी का बहाव गांव की ओर बढ़ रहा है। यहां की महिलाओं ने प्रशासन से मांग की है कि गांव के लोगाें पर दर्ज किए मामले रद्द करते हुए उनके गांव को डूबने से बचाया जाए। महिलाआें ने बताया कि उनकी फसलें तो तबाह हो चुकी हैं, अगर बाढ़ से उनके मकान भी गिर गए तो उनके परिवार पूरी तरह से तबाह हो जाएंगे। सूर्य छिपते ही इस गांव में धारा 144 लागू हो जाती है।
विज्ञापन