{"_id":"9c450f0aa048ed1b681633ccc1738e5a","slug":"strike-71","type":"story","status":"publish","title_hn":"अनिश्चित हड़ताल पर गए एनआरएचएम कर्मचारी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अनिश्चित हड़ताल पर गए एनआरएचएम कर्मचारी
अमर उजाला, बठिंडा।
Updated Mon, 17 Feb 2014 10:37 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बादल सरकार की कर्मचारी विरोधी नीतियों के खिलाफ एनएचआरएम कर्मचारी सोमवार को अनिश्चित समय के लिए हड़ताल पर चले गए।
इससे पहले सेहत विभाग में एएनएम आशा वर्कर के हड़ताल पर होने के कारण सेहत विभाग का काम राम भरोसे चल रहा था। लेकिन अब एनआरएचएम कर्मचारियों, डॉक्टरों और डिस्पेंसरों के हड़ताल पर जाने से सेहत विभाग में खलबली मच गई है। वहीं हड़ताल पर चल रही सभी कर्मचारी यूनियनों का एक मंच पर आ जाने के कारण कर्मचारियों का हौसला और भी बढ़ गया है।
यूनियन जिला प्रधान परमिंदर पाल बराड़ ने बताया कि एनआरएचएम कर्मचारियों की ओर से पिछले छह सालों से राज्य सरकार के कई मंत्रियों को मांगों के समाधान के लिए आग्रह किया गया। शहर मे चल रहे कर्मचारियों और किसानों के संघर्ष को उन्होंने बादल सरकार की राज नहीं, सेवा का परिणाम बताया।
बराड़ ने पिछले दिनों मासूम बच्ची रूथ की हुई मौत को बादल सरकार की ओर से किया गया कत्ल बताया। आशा वर्करों ने कहा कि उनको अपने बच्चों को इस संघर्ष में साथ लेकर चलने की कोई खुशी नहीं, लेकिन बादल सरकार ने उनके लिए और कोई रास्ता नहीं छोड़ा। उनके बच्चे पांच सौ रुपये महीने में आज की महंगाई के कारण ही भूखे मर जाएंगे और माता पिता होने के नाते वह अपने बच्चों को भूखा मारने की जगह संघर्ष में साथ लेकर चलने को प्राथमिकता देंगे। सेहत विभाग के कर्मचारियों ने कहा कि यदि बादल सरकार की ओर से उनकी मांगें न मानी गईं, तो इस संघर्ष के परिणाम सरकार के लिए अच्छे नहीं होंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
इससे पहले सेहत विभाग में एएनएम आशा वर्कर के हड़ताल पर होने के कारण सेहत विभाग का काम राम भरोसे चल रहा था। लेकिन अब एनआरएचएम कर्मचारियों, डॉक्टरों और डिस्पेंसरों के हड़ताल पर जाने से सेहत विभाग में खलबली मच गई है। वहीं हड़ताल पर चल रही सभी कर्मचारी यूनियनों का एक मंच पर आ जाने के कारण कर्मचारियों का हौसला और भी बढ़ गया है।
यूनियन जिला प्रधान परमिंदर पाल बराड़ ने बताया कि एनआरएचएम कर्मचारियों की ओर से पिछले छह सालों से राज्य सरकार के कई मंत्रियों को मांगों के समाधान के लिए आग्रह किया गया। शहर मे चल रहे कर्मचारियों और किसानों के संघर्ष को उन्होंने बादल सरकार की राज नहीं, सेवा का परिणाम बताया।
विज्ञापन
बराड़ ने पिछले दिनों मासूम बच्ची रूथ की हुई मौत को बादल सरकार की ओर से किया गया कत्ल बताया। आशा वर्करों ने कहा कि उनको अपने बच्चों को इस संघर्ष में साथ लेकर चलने की कोई खुशी नहीं, लेकिन बादल सरकार ने उनके लिए और कोई रास्ता नहीं छोड़ा। उनके बच्चे पांच सौ रुपये महीने में आज की महंगाई के कारण ही भूखे मर जाएंगे और माता पिता होने के नाते वह अपने बच्चों को भूखा मारने की जगह संघर्ष में साथ लेकर चलने को प्राथमिकता देंगे। सेहत विभाग के कर्मचारियों ने कहा कि यदि बादल सरकार की ओर से उनकी मांगें न मानी गईं, तो इस संघर्ष के परिणाम सरकार के लिए अच्छे नहीं होंगे।
विज्ञापन