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प्रदूषण रहित दीपावली से बचेगा स्वास्थ्य

Tue, 29 Oct 2013 10:43 PM IST
अमर उजाला, फरीदकोट
अमर उजाला, फरीदकोट Updated Tue, 29 Oct 2013 10:43 PM IST
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Avoid pollution-free diwali for health
दीपावली पर हर वर्ष अरबों रुपये के पटाखे चलते हैं। इससे वातावरण प्रदूषित होता है। जहरीली गैसों से लोग गंभीर बीमारियां की चपेट में आते हैं।
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यह विचार बाबा फरीद मेडिकल यूनिवर्सिटी के कार्यकारी इंजीनियर और स्टेट अवार्डी राज अग्रवाल ने व्यक्त किए। उन्होंने प्रदूषण रहित दीपावली मनाने को कहा।

  अग्रवाल ने कहा कि हम इस त्योहार को दीयों से ज्यादा पटाखों के त्योहार के रूप में मनाते हैं। एक अनुमान के अनुसार पटाखों की वजह से हर वर्ष 13 हजार से अधिक लोग हादसों का शिकार होते हैं।

ऐसे में प्रदूषण रहित दीपावली मनाना ही समय की सबसे बड़ी मांग है। पटाखों का कम से कम उपयोग करने और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में पटाखों पर पूर्ण पाबंदी की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा पटाखे तमिलनाडु के शिवाकाशी शहर में तैयार होते हैं।
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पटाखे बनाने के मसाले में 75 प्रतिशत पोटाशियम, 10 प्रतिशत कोयला, 10 प्रतिशत गंधक और 5 प्रतिशत शीशे समेत अन्य पदार्थों का उपयोग किया जाता है।

 अग्रवाल ने कहा कि पटाखों के चलने से जहरीली गैस सल्फर डाई आक्साइड, नाइट्रोजन मोनो आक्साइड, कार्बन मोनो आक्साइड व कार्बन डाई आक्साइड निकलती है।

इनका वातावरण में 6 से 8 घंटे तक असर रहता है। इसकी गैस व शोर से रक्तचाप, दिल के दौरे, सांस, फेफडे़, अस्थमा, खांसी, चमड़ी और एलर्जी समेत अन्य गंभीर बीमारियां जन्म लेती हैं।
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इससे आंख, नाक व कान की समस्याएं पैदा होती हैं। छोटे बच्चे और गर्भवती महिलाएं ज्यादा प्रभावित होती हैं। उन्होंने कहा कि एक अनुमान के अनुसार हर वर्ष पटाखों के लिए 350 टन कागज का उपयोग किया जाता है जोकि लगभग 20 हजार वृक्षों की कटाई से मिलता है।
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