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परमवीर: सिख रेजिमेंट का वो वीर, जो अकेला ही पाकिस्तान की फ़ौज पर भारी पड़ा

19 November 2022

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13 अक्टूबर, 1948. ये वो तारीख़ है, जब पाकिस्तान ने टिथवाल की रीछमार गली से हमला कर भारतीय सेना को पीछे धकेलने की कोशिश की. मगर मौके पर मौजूद सिख रेजिमेंट के एक जवान ने उनकी इस कोशिश को सफल नहीं होने दिया...

परमवीर: सिख रेजिमेंट का वो वीर, जो अकेला ही पाकिस्तान की फ़ौज पर भारी पड़ा

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1948 की गर्मियों में जम्मू-कश्मीर ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तानी सेना और कबाइलियों ने संयुक्त रूप से टीथवाल सेक्टर में भीषण आक्रमण किया. इस हमले में दुशमन ने भारतीय सेना को किशनगंगा नदी पर बने अग्रिम मोर्चे छोड़ने पर मजबूर कर दिया...

भारत-पाकिस्तान के बीच हुई तीसरी जंग का जिक्र जब-जब होगा तब-तब आपको भारत के उन सूरमाओं की कहानियां सुनने को मिलेंगी जिन्हें सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। इन सूरमाओं में से ही एक हैं शहीद सेकेंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल
 

पॉइंट 4875 और फ्लैट टॉप, इन दोनों चौकियों को शत्रु से मुक्त कराने का 17 जाट रेजीमेंट का एक प्रयास असफल रहा था, अब भारतीय सेना के सामने बड़ी चुनौती थी। तब जैक राइफल को इन दोनों चौकियों को जीतने का दायित्व सौंपा गया।

13 अक्टूबर, 1948. ये वो तारीख़ है, जब पाकिस्तान ने टिथवाल की रीछमार गली से हमला कर भारतीय सेना को पीछे धकेलने की कोशिश की. मगर मौके पर मौजूद सिख रेजिमेंट के एक जवान ने उनकी इस कोशिश को सफल नहीं होने दिया...

चीन के 200 सैनिकों ने दो बार हमला किया। सूबेदार जोगिंदर सिंह और उनके केवल 20 साथी सैनिकों ने दोनों बार खदेड़ा। तीसरी बार भी आ गए चीनी। इधर गोली खत्म थी। बिना हथियार के ही भिड़ गए। बलिदान ऐसे हुए कि चीनियों को भी सम्मान देना पड़ा।

फिल्लौर की लड़ाई में लेफ्टिनेंट कर्नल अर्देशिर बुरज़ोरजी तारापोर ने पाकिस्तान के 60 टैंकों को ध्वस्त कर देश के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया था

1971 की भारत-पाकिस्तान की लड़ाई के दौरान 3 और 4 दिसंबर की रात पाकिस्तानी सेना अगरतला के अंदर घुसपैठ की कोशिश में थी, जिसे भारतीय सेना के कुछ जवानों ने अपना बलिदान देकर बेकार कर दिया. लांस नायक अल्बर्ट एक्का इन्हीं में से एक थे
 

कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना किसी भी कीमत पर सेक्टर द्रास की टाइगर हिल पर अपना कब्ज़ा चाहती थी. इसी के तहत 4 जुलाई ,1999 को 18 ग्रेनेडियर्स के एक प्लाटून को टाइगर हिल के बेहद अहम तीन दुश्मन बंकरों पर कब्ज़ा करने का दायित्व सौंपा गया था

13 अक्टूबर, 1948. ये वो तारीख़ है, जब पाकिस्तान ने टिथवाल की रीछमार गली से हमला कर भारतीय सेना को पीछे धकेलने की कोशिश की. मगर मौके पर मौजूद सिख रेजिमेंट के एक जवान ने उनकी इस कोशिश को सफल नहीं होने दिया...

20 साल की उम्र में अब्दुल हमीद ने भारतीय सेना की वर्दी पहनी, 1965 की जंग में अदम्य वीरता के लिए उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र दिया गया

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