पश्चिम एशिया लगातार अशांत बना हुआ है। इस्राइल और हमास का हिंसक संघर्ष बीते 10 महीने से अधिक समय से जारी है। इसी बीच ईरान समर्थित हिजबुल्ला और इस्राइल का टकराव नई चिंता को जन्म दे रहा है। हिजबुल्ला पहले भी इस्राइल के साथ एक महीने लंबी लड़ाई कर चुका है। ताजा घटनाक्रम में 300 से अधिक रॉकेट फायर किए जाने के बाद पलटवार करते हुए इस्राइल ने लेबनान के 100 ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की है। बढ़ते तनाव और अतिसंवेदनशील भूराजनीतिक माहौल के बीच कुछ सवालों के जवाब समझना जरूरी है। मसलन, लेबनान, हिजबुल्ला और ईरान पश्चिम एशिया में शांति बहाली के लिहाज से क्यों अहम कारक हैं? कहां से मिलती है इस सशस्त्र संगठन को ताकत? जानिए ऐसे तमाम सवालों के जवाब
दोनों का ताजा टकराव चिंताजनक क्यों
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इस्राइल vs हिजबुल्ला
- फोटो : AMAR UJALA
इस्राइल और हिजबुल्ला के बीच टकराव की शुरुआत पश्चिम एशिया के साथ-साथ दुनिया के लिए नई चिंता का सबब है। ऐसा इसलिए क्योंकि खबरों के मुताबिक 300 से अधिक रॉकेट हमलों से तिलमिलाए इस्राइल ने जवाबी हमले में 100 से अधिक जगहों पर रॉकेट स्ट्राइक की। हिजबुल्ला सुप्रीमो नसरल्ला स्थानीय समय के मुताबिक रविवार शाम करीब छह बजे इस्राइल पर हमले के बारे में विस्तार से जानकारी देंगे। हमलों का सीधा असर शेयर बाजार पर दिखने लगा है। हिजबुल्ला और इस्राइल के टकराव को देखते हुए फ्रांस को अपनी उड़ान रद्द करनी पड़ी है। दूसरी तरफ ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने इस्राइली भूभाग में हुए हवाई हमलों की सराहना की है। इससे कई मोर्चे पर तनाव बढ़ता दिख रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने यु्द्धविराम की अपील करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।
हिजबुल्ला का सशस्त्र संगठन आतंकी वारदातों में लिप्त
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इस्राइल के लड़ाकू विमान (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : Freepik
अमेरिका हिजबुल्ला को आतंकी संगठन घोषित कर चुका है। अमेरिका के मुताबिक 1980 के दशक में हुए बम धमाकों का दोषी हिजबुल्ला, 2005 में लेबनान की राजधानी बेरूत में अमेरिकी मरीन को निशाना बना चुका है। यूरोपीय संघ के मुताबिक हिजबुल्ला का सशस्त्र संगठन आतंकी वारदातों में लिप्त है। साल 2022 में संयुक्त राष्ट्र की एक अदालत ने 2005 बेरूत बम धमाकों के लिए हिजबुल्ला के दो सदस्यों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसमें लेबनान के पूर्व प्रधानमंत्री राफिक हरीरी का नाम भी शामिल था, जिनकी मौत हो चुकी है।