नेपाल के ललितपुर के खोखना गांव में लोगों ने शुक्रवार को 'सिकाली जात्रा' मनाई। 'सिकाली जात्रा' देवी सिकली को समर्पित पांच दिवसीय त्योहार है।
नेपाल : ललितपुर में मनाई गई 'सिकाली जात्रा', मान्यता है देवी-देवता भी बनते हैं इसके साक्षी
काठमांडू घाटी के ललितपुर जिले में खोखना के नेवार गांव के एक पुजारी बेखानर महारजन ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, "घटस्थापना के दिन से जात्रा की शुरुआत हो जाती है। हमारे यहां जमरा या टीका पहनने की परंपरा नहीं है।
देवी रुद्रयानी या सिकाली को पूरे गांव में एक लकड़ी के रथ में घुमाने के साथ अनुष्ठान की शुरुआत है। जिसके बाद खोकाना में मंदिर के सामने विभिन्न धार्मिक तांबे के बर्तन के साथ विश्राम के लिए रखा जाता है।
इस जात्रा के दौरान रंगीन परिधानों में नकाबपोश नृत्यों के साथ "तांत्रिक" अनुष्ठान किए जाते हैं जो 14 हिंदू देवी-देवताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। 14 देवताओं जिनके मुंह ढके हुए होते हैं उनके साथ सफेद वस्त्र पहने पुजारी भी नृत्य करते हैं।
यह माना जाता है कि देवी उनके शहर को दुर्भाग्य से बचाती हैं और आपदाओं को भी रोकती हैं। इसके साथ ही, यह किसानों के लिए फसल के बाद के मौसम में खुशी मनाने का अवसर माना जाता है। जात्रा के दौरान दिखाए गए नृत्य विभिन्न धार्मिक मान्यताओं और धारणा पर आधारित होते हैं।
Nepal: People celebrated 'Sikali Jatra' in Khokana village of Lalitpur yesterday.
'Sikali Jatra' is a five-day festival dedicated to goddess Sikali. pic.twitter.com/DgHjy57qAm
— ANI (@ANI) October 24, 2020