अमेरिका की राजनीति में इस वक्त एक शब्द बार-बार गूंज रहा है। वह है महाभियोग। दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के पहले ऐसे राष्ट्रपति बन गए हैं, जिन्हें एक ही कार्यकाल में दो बार महाभियोग का सामना करना पड़ गया। गौर करने वाली बात यह है कि अमेरिका में अब तक कई राष्ट्रपतियों पर महाभियोग लग चुका है। इस रिपोर्ट में जानते हैं कि अब तक जिन-जिन राष्ट्रपति पर महाभियोग लगा, उनका क्या हुआ?
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अमेरिका में अब तक जिन राष्ट्रपतियों पर चला महाभियोग, उनका क्या हुआ?
Wed, 20 Jan 2021 06:26 PM IST
कुमार संभव
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
Published by: कुमार संभव
Updated Wed, 20 Jan 2021 06:26 PM IST
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अमेरिकी संसद
- फोटो : PTI
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एंड्रयू जॉनसन पर सबसे पहले लगा महाभियोग
एंड्रयू जॉनसन
- फोटो : सोशल मीडिया
अमेरिका में जिस राष्ट्रपति पर सबसे पहले महाभियोग लगा, उनका नाम एंड्रयू जॉनसन है। दरअसल, अमेरिका में गृह युद्ध के बाद डेमोक्रेट पार्टी के एंड्रयू जॉनसन राष्ट्रपति बने। उस दौरान
रिपब्लिकन पार्टी के कब्जे वाले दक्षिणी राज्यों के विकास के मुद्दे को लेकर उनकी अक्सर तकरार होती थी, क्योंकि जॉनसन हर बार राष्ट्रपति की वीटो पावर इस्तेमाल करके उनके कदम रोक देते थे। ऐसे में रिपब्लिक पार्टी की कांग्रेस ने टेन्योर ऑफ ऑफिस एक्ट पारित किया, जिससे राष्ट्रपति के कई अधिकार सीमित हो रहे थे। ऐसे में राष्ट्रपति जॉनसन ने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी और कैबिनेट सदस्य एडविन स्टेंटन को निलंबित कर दिया। स्टेंटन को पद से हटाने के बाद सदन के रिपब्लिकन नेता महाभियोग का प्रस्ताव ले आए। उन्होंने जॉनसन पर 11 आरोप लगाए। हालांकि, महाभियोग के समर्थन में दो-तिहाई बहुमत से सिर्फ एक वोट कम पड़ा और जॉनसन जैसे-तैसे महाभियोग से बरी हो गए।
रिपब्लिकन पार्टी के कब्जे वाले दक्षिणी राज्यों के विकास के मुद्दे को लेकर उनकी अक्सर तकरार होती थी, क्योंकि जॉनसन हर बार राष्ट्रपति की वीटो पावर इस्तेमाल करके उनके कदम रोक देते थे। ऐसे में रिपब्लिक पार्टी की कांग्रेस ने टेन्योर ऑफ ऑफिस एक्ट पारित किया, जिससे राष्ट्रपति के कई अधिकार सीमित हो रहे थे। ऐसे में राष्ट्रपति जॉनसन ने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी और कैबिनेट सदस्य एडविन स्टेंटन को निलंबित कर दिया। स्टेंटन को पद से हटाने के बाद सदन के रिपब्लिकन नेता महाभियोग का प्रस्ताव ले आए। उन्होंने जॉनसन पर 11 आरोप लगाए। हालांकि, महाभियोग के समर्थन में दो-तिहाई बहुमत से सिर्फ एक वोट कम पड़ा और जॉनसन जैसे-तैसे महाभियोग से बरी हो गए।
वॉटरगेट स्कैंडल में रिचर्ड निक्सन पर महाभियोग
रिचर्ड निक्सन
- फोटो : सोशल मीडिया
रिचर्ड निक्सन अमेरिका के ऐसे दूसरे राष्ट्रपति थे, जिन पर महाभियोग चला। दरअसल, अमेरिका में 1972 के दौरान वॉटरगेट ऑफिस कॉम्प्लेक्स स्थित डेमोक्रेटिक पार्टी के मुख्यालय में लूट हुई थी। जांच में सामने आया था कि लुटेरों को निक्सन के चुनाव अभियान से पैसा दिया गया था। करीब दो साल तक निक्सन खुद को बचाने की कोशिश करते रहे, लेकिन उनके सभी प्रयास असफल हो गए। जुलाई 1974 के दौरान सदन की न्यायिक समिति ने महाभियोग का प्रस्ताव पास किया। इसके तहत निक्सन पर न्याय में बाधा डालने, पद का दुरुपयोग करने और कांग्रेस की अवमानना के आरोप लगाए गए। इन्हें सीनेट के सामने मतदान के लिए भेजा गया, लेकिन इन पर कभी वोटिंग नहीं हुई। विवाद नहीं थमा तो 8 अगस्त 1974 को राष्ट्रपति निक्सन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। बता दें कि अमेरिकी इतिहास में इस्तीफा देने वाले निक्सन अकेले राष्ट्रपति हैं।
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महाभियोग में ऐसे फंसे बिल क्लिंटन
bill clinton
बिल क्लिंटन जब राष्ट्रपति बने तो एक साल बाद ही उनके खिलाफ न्याय विभाग के विशेष अभियोजक ने जांच शुरू कर दी। दरअसल, इसके तहत उनके रियल एस्टेट के सौदों की जांच की जा रही थी, लेकिन जनवरी 1998 में इंटर्न मोनिका लेविंस्की के साथ उनके अफेयर का मामला भी इसी जांच में जोड़ लिया गया। सितंबर 1998 में जांच रिपोर्ट कांग्रेस के समक्ष पेश की गई। इस रिपोर्ट में महाभियोग के 11 संभावित कारण बताए गए और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव ने राष्ट्रपति क्लिंटन पर महाभियोग चलाने के समर्थन में वोट किया। हालांकि, फरवरी 1999 में क्लिंटन को रिपब्लिकन पार्टी के नियंत्रण वाली सीनेट ने बरी कर दिया।
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ट्रंप के खिलाफ दो बार महाभियोग प्रस्ताव
डोनाल्ड ट्रंप
- फोटो : PTI
अमेरिकी संसद भवन (कैपिटल) पर भीड़ को विद्रोह के लिए उकसाने के आरोप में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर निचले सदन (प्रतिनिधि सभा) में 197 के मुकाबले 232 मतों से महाभियोग प्रस्ताव पारित कर दिया गया। इस प्रस्ताव को दस रिपब्लिकन पार्टी के सदस्यों का समर्थन भी मिला। राष्ट्रपति पर आरोप है कि उन्होंने छह जनवरी 2021 को एक रैली के दौरान अपने भाषण से भीड़ को हिंसा के लिए उकसाया। इससे पहले दिसंबर-2019 में भी ट्रंप के खिलाफ महाभियोग लाया गया था। उस वक्त उन पर यूक्रेन से बाइडन की जांच का कहकर कानून तोड़ने का आरोप था। उस दौरान सीनेट में रिपब्लिकन का बहुमत था, जिसके चलते उन्हें आरोपों से मुक्त कर दिया गया।