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गजब: मारूफ के खेतों में उगे फूलों से महकते हैं राष्ट्रपति भवन और संसद, 30 लोगों को दे रहे रोजगार

Mon, 28 Feb 2022 03:07 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शामली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शामली Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 28 Feb 2022 03:07 PM IST
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Rashtrapati Bhavan and Parliament decorated with maroof flowers from Shamli UP, gives regular employment to 30 people
मारूफ के खेतों में उगे फूल - फोटो : अमर उजाला

उत्तर प्रदेश के शामली जनपद के गढ़ीपुख्ता कस्बे के प्रगतिशील किसान मारूफ आलम खान फूलों की खेती से पूरे देश में नाम कमा रहे हैं। उनके खेतों के फूल राष्ट्रपति भवन व संसद की भी शोभा बढ़ा रहे हैं। दो बार बाबा बद्रीनाथ के भवन के कपाट भी उनके खेतों के फूलों से सजाए जा चुके हैं। 



गढ़ीपुख्ता कस्बे के मोहल्ला बिलौचियान निवासी युवा किसान मारूफ आलम खान पैतृक जमीन पर फूलों की खेती करते हैं। वह पिछले करीब 22 साल से रजनीगंधा व ग्लेडियोलस और मल्टीकलर फूलों की खेती कर रहे हैं। उनके पास 90 बीघा भूमि है। जिसमें से 70 बीघा में फूलों की खेती की जा रही है।

Rashtrapati Bhavan and Parliament decorated with maroof flowers from Shamli UP, gives regular employment to 30 people
मारूफ के खेतों में उगे फूल - फोटो : अमर उजाला

उन्होंने हॉलैंड से ग्लेडियोलस का बीज लाकर खेती की शुरूआत की। शुरू में उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और खेतों में फूल खिल उठे। वह दिल्ली की गाजीपुर मंडी, देहरादून, पटियाला, चंडीगढ़ में फूल लेकर जाते हैं। जहां उन्हें फूलों के बड़े किसान के रूप में पहचान मिली।

Rashtrapati Bhavan and Parliament decorated with maroof flowers from Shamli UP, gives regular employment to 30 people
किसान मारूफ व उनके खेतों में उगे फूल - फोटो : अमर उजाला

उन्होंने बताया कि मार्च माह में रजनीगंधा का बीज डाला जाता है, जबकि ग्लेडियोलस का बीज जुलाई माह में डाला जाता है। रजनीगंधा का फूल पूरे साल चलता रहता है, इसका बीज मात्र एक रुपया में पड़ता है। इसकी लागत प्रति बीघा में करीब 12 हजार रुपये आती है। 


 
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Rashtrapati Bhavan and Parliament decorated with maroof flowers from Shamli UP, gives regular employment to 30 people
मारूफ के खेतों में उगे फूल - फोटो : अमर उजाला

विदेशी फूल ग्लेडियोलस की कीमत दो रुपये प्रति बीज है। जिसकी लागत लगभग 24 हजार रुपये आती है। उन्हें प्रति बीघा एक से डेढ़ लाख रुपये तक आमदनी हो जाती है। मंडी में इन फूलों के बंडल बनाकर भेजे जाते हैं। जहां उन्हें 300 रुपये प्रति बंडल के हिसाब से भुगतान मिलता है। इन दोनों फूलों की किस्मों की देहरादून, चंडीगढ़, पटियाला में बहुत ज्यादा मांग है। 


 
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Rashtrapati Bhavan and Parliament decorated with maroof flowers from Shamli UP, gives regular employment to 30 people
मारूफ के खेतों में उगे फूल - फोटो : अमर उजाला

शादी, विवाह, पार्टी के अलावा कोई अन्य कार्यक्रम हों, इन फूलों से बने बुके ही भेंट किए जाते हैं। 24 जनवरी 2021 को भी शामली में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें सांसद प्रदीप चौधरी व डीएम जसजीत कौर सम्मानित कर चुके हैं। मारूफ खान कहते हैं उनकी इच्छा है कि क्षेत्र के युवा भी फूलों की खेती की ओर अग्रसर होकर देश का नाम विदेशों में भी रोशन करें।

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