महंगाई बढ़ने के साथ आम जरूरतों का खर्च भी लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में ज्यादा कमाई करना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी यह देखना भी है कि पैसा कहां और कितना खर्च हो रहा है। कई बार अच्छी इनकम होने के बाद भी महीने के आखिरी दिनों में जेब ढीली पड़ जाती है। इसकी वजह अक्सर बिना प्लानिंग के खर्च करना होती है। अगर आपके साथ भी ऐसा होता है तो अपनी कुछ आदतों पर नजर डालने का समय आ गया है।
Spending Habits: सैलरी अच्छी है फिर भी महीने के अंत में हो जाते हैं कंगाल? इन आदतों की वजह से उड़ रहा है पैसा
How to Control Bad Spending Habits: अच्छी कमाई के बावजूद अगर महीने के आखिर में पैसों की कमी हो जाती है तो इसकी वजह सिर्फ कम आय नहीं, बल्कि खर्च करने की गलत आदतें भी हो सकती हैं। कुछ आसान नियम अपनाकर फिजूलखर्ची पर लगाम लगाई जा सकती है और बचत बढ़ाई जा सकती है।
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पहले समझें पैसा जा कहां रहा है
सबसे पहले यह पता लगाएं कि आपका पैसा सबसे ज्यादा किस जगह खर्च हो रहा है। क्या बोरियत या तनाव में ऑनलाइन शॉपिंग बढ़ जाती है? क्या बाहर खाने या एंटरटेनमेंट पर जरूरत से ज्यादा रकम चली जाती है? ऐसे ट्रिगर्स की पहचान करना खर्च कम करने की दिशा में पहला कदम है।
बजट को सिर्फ बनाएं नहीं, फॉलो भी करें
महीने की शुरुआत में इनकम और सभी जरूरी खर्चों का हिसाब तैयार करें। राशन, किराया, बिजली के बिल, एंटरटेनमेंट और दूसरे खर्चों के लिए रकम तय करें। इससे आपको पहले से पता रहेगा कि कितना पैसा कहां इस्तेमाल करना है।
महंगी चीज के लिए अपनाएं 30 दिन का नियम
कोई महंगी चीज पसंद आ गई है तो उसे तुरंत खरीदने के बजाय 30 दिन रुकें। इस दौरान खुद से पूछें कि वह चीज सच में जरूरी है या सिर्फ खरीदने की इच्छा है। यह तरीका आवेग में होने वाली खरीदारी को कम कर सकता है।
सैलरी आते ही बचत करें
बचत के लिए महीने के अंत का इंतजार न करें। सैलरी मिलते ही तय रकम सेविंग या इंवेस्टमेंट अकाउंट में ट्रांसफर कर दें। इससे खर्च के लिए उपलब्ध पैसा सीमित रहेगा और बचत की आदत मजबूत होगी।
तनाव में शॉपिंग की जगह अपनाएं ये आदतें
अगर स्ट्रेस दूर करने के लिए खरीदारी करते हैं तो इसकी जगह व्यायाम, पढ़ाई, मेडिटेशन या दोस्तों से बातचीत जैसे विकल्प आजमाएं। इससे मन भी बेहतर होगा और बेवजह खर्च भी नहीं होगा।
हर महीने करें अपनी समीक्षा
महीने के आखिर में देखें कि आपने कितना खर्च घटाया और कितनी बचत बढ़ाई। छोटे लक्ष्य पूरे होने पर खुद को प्रोत्साहित करें। धीरे-धीरे यही छोटे बदलाव आपकी वित्तीय आदतों को बेहतर बना सकते हैं।