Green Hydrogen: क्या है ग्रीन हाइड्रोजन, क्यों इसे कहा जा रहा भारत के भविष्य का ईंधन?
ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य का साफ और टिकाऊ ईंधन माना जा रहा है, जो भारत को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बना सकता है। सवाल यह है कि क्या यह वाकई पेट्रोल और डीजल की जगह लेकर देश का अगला मुख्य ईंधन बन पाएगा?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारत सरकार साल 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य प्राप्त करना चाहती है। इसको लेकर सरकार कई दिशा में काम कर रही है, यही नहीं भारत सरकार नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन पर भी काम कर रही है। ऐसे में आपको इस बारे में जानना जरूरी है कि आखिर ग्रीन हाइड्रोजन है क्या?
क्या होता है ग्रीन हाइड्रोन?
हम सभी जानते हैं कि पानी H2O से बना होता है। इसमें हाइड्रोजन के 2 और ऑक्सीजन का 1 अणु होता है। अगर इन्हें इलेक्ट्रोलाइजर की मदद से अलग किया जाए, तो हाइड्रोजन अलग हो जाता है। इलेक्ट्रोलाइजर एक खास मशीन होती है, जो बिजली के करंट से अणुओं को तोड़ती है। ग्रीन हाइड्रोजन आमतौर पर वहीं तैयार किया जाता है, जहां भरपूर धूप, तेज हवा और पर्याप्त पानी उपलब्ध हो। इसी कारण इसके प्लांट रेगिस्तानी इलाकों, समुद्र किनारे या बड़े सोलर और विंड एनर्जी प्रोजेक्ट्स के पास लगाए जाते हैं।
बड़े-बड़े प्लांट्स में इलेक्ट्रोलाइजर मशीनें पानी को तोड़कर हाइड्रोजन बनाने का काम करती हैं, जिसे बाद में टैंकों में स्टोर किया जाता है या पाइपलाइन के जरिए अलग-अलग जगहों तक पहुंचाया जाता है। सरल शब्दों में ग्रीन हाइड्रोजन ऐसा ईंधन है जो पानी से बनता है, साफ ऊर्जा से तैयार होता है और इस्तेमाल के बाद फिर से पानी में बदल जाता है यही इसे भविष्य का फ्यूल बनाता है।
भारत हर साल बड़ी मात्रा में कोयला, पेट्रोल और डीजल के लिए लाखों करोड़ रुपये खर्च करता है। वहीं ग्रीन हाइड्रोजन को उपयोग में लाने से जीवाश्म ईंधन की खपत कम होगी और इससे कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी। भारत नेशनल हाइड्रोजन मिशन के अंतर्गत गीन हाइड्रोजन का टारगेट जल्द पूरा करना चाहता है।
अगर यह मिशन सही दिशा में आगे चलता है तो आने वाले समय में भारत ग्रीन हाइड्रोजन का एक बड़ा सप्लायर और उत्पादक देश बन सकता है। ऐसा होने पर देश में पेट्रोल, डीजल और कोयले की खपत काफी हद तक कम हो सकती है।
आने वाले समय में ग्रीन हाइड्रोजन भारत को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बना सकता है। इससे न सिर्फ आयात पर खर्च कम होगा, बल्कि पर्यावरण को भी बड़ा फायदा मिलेगा। अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चला, तो वह दिन दूर नहीं जब भारत में गाड़ियों से लेकर फैक्ट्री तक कई काम ग्रीन हाइड्रोजन पर चल रहे होंगे।