Fixed Deposit Legal Heir Rules: बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट करवाते समय नॉमिनी का नाम दर्ज करना बेहद जरूरी माना जाता है। नॉमिनी वह व्यक्ति होता है, जिसे खाताधारक की मृत्यु के बाद बैंक आसानी से पूरा पैसा सौंप देता है। हालांकि, कई बार लोग जल्दबाजी या जानकारी के आभाव की वजह एफडी फॉर्म में नॉमिनी का नाम भरना भूल जाते हैं।
जिन लोगों के एफडी में नॉमिनी का नाम नहीं रहता है उनकी मौत के बाद उनके परिजनों को एफडी का पैसा पाने के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कुछ लोगों के मन में ये भी भ्रम रहता है जिन एफडी में नॉमिनी का नाम नहीं है, उनके मौत के बाद पुरा पैसा डूब जाता है, जो की पूरी तरह गलत है। आइए इस लेख में समझते हैं कि अगर एफडी में नॉमिनी दर्ज न हो, तो वह पैसा किसे मिलता है।
कानूनी वारिसों का अधिकार
- अगर एफडी में कोई नॉमिनी नहीं है, तो पैसा किसी एक व्यक्ति को सीधे नहीं मिलता, बल्कि उस पर खाताधारक के सभी कानूनी वारिसों का समान अधिकार होता है।
- भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम के तहत पत्नी, बच्चे और मां प्रथम श्रेणी के कानूनी वारिस माने जाते हैं। अगर खाताधारक ने कोई वसीयत नहीं बनाई है, तो जमा राशि को सभी कानूनी वारिसों के बीच बराबर-बराबर बांटा जाता है।
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बैंक में जमा करने होंगे ये जरूरी दस्तावेज
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बैंक में जमा करने होंगे ये जरूरी दस्तावेज
- नॉमिनी न होने पर पैसों का क्लेम करने के लिए कानूनी वारिसों को बैंक में कई कागजात जमा करने पड़ते हैं। इसमें खाताधारक का मृत्यु प्रमाण पत्र, सभी वारिसों के पहचान पत्र और संबंध साबित करने वाले दस्तावेज शामिल हैं।
- इसके अलावा, बैंक को यह भरोसा दिलाने के लिए कि कोई अन्य दावेदार नहीं है, सभी वारिसों से एक संयुक्त क्लेम फॉर्म और इंडेम्निटी बॉन्ड भी भरवाया जाता है।
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बड़ी रकम के लिए लीगल हेयर सर्टिफिकेट
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बड़ी रकम के लिए लीगल हेयर सर्टिफिकेट
- अगर एफडी की रकम ज्यादा है, तो बैंक केवल साधारण कागजातों से संतुष्ट नहीं होता। ऐसी स्थिति में बैंक परिवार से 'लीगल हेयर सर्टिफिकेट' या अदालत द्वारा जारी 'सक्सेशन सर्टिफिकेट' मांग सकता है।
- यह प्रमाणपत्र राजस्व विभाग या सिविल कोर्ट से बनता है, जिसमें कानूनी रूप से तय किया जाता है कि मृतक की संपत्ति पर असल में किसका अधिकार है।
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विवाद से बचने के लिए तुरंत करें यह काम
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विवाद से बचने के लिए तुरंत करें यह काम
- अदालत और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से बचने का सबसे आसान तरीका है कि एफडी करवाते ही नॉमिनी का नाम जरूर दर्ज कराएं।
- अगर आपकी पुरानी एफडी में नॉमिनी नहीं जुड़ा है, तो आप आज ही बैंक जाकर फॉर्म-DA1 भरकर नॉमिनी जोड़ सकते हैं।
- समय रहते नॉमिनेशन की प्रक्रिया पूरी करने से आपके जाने के बाद परिवार को आर्थिक तंगी और कानूनी उलझनों का सामना नहीं करना पड़ेगा।