वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने और ओलंपिक में क्वालीफाई करने के बाद चल रही थी तैयारी लेकिन एक फोन ने बदल दी दुनिया। दक्षिण अफ्रीका की महिला क्रिकेटर ताजमिन ब्रिट्स की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है।
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ताजमिन ब्रिट्स
- फोटो : social media
2007 में जेवलिन थ्रो में जूनियर वर्ल्ड चैंपियन बनने के बाद ब्रिट्स की नजर ओलंपिक खेलों पर थी। उन्होंने उसे लक्ष्य बनाते हुए 2011 में हुए वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर ओलंपिक में क्वालीफाई भी कर लिया। उनका देश के लिए ओलंपिक खेलने का सपना लगभग पूरा होने वाला था और वे उसकी तैयारियों के बारे में सोच रही थीं लेकिन उससे पहले ही एक दुर्घटना ने उनकी जिंदगी को 360 डिग्री में घुमाकर रख दिया।
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ताजमिन ब्रिट्स
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2012 लंदन ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने के बाद ब्रिट्स अपने दोस्तों के साथ खुशी मनाने के लिए गाड़ी से सड़कों पर निकल गईं। लेकिन कुछ पलों बाद ही उनकी खुशी खामोशी में बदल गई।
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ताजमिन ब्रिट्स
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ब्रिट्स ने गाड़ी चलाते वक्त अपना फोन निकालकर देखने की कोशिश की और इसी दौरान उनकी गाड़ी का संतुलन बिगड़ गया। देखते-देखते उनकी गाड़ी का एक्सीडेंट हो गया और उनकी जिंदगी बदल गई।वे दो हफ्ते तक आईसीयू में रहीं, दो महीने तक अस्पताल में रहीं, उन्हें व्हीलचेयर का सहारा छोड़कर अपने पैरों पर चलने में एक साल लगे।
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ताजमिन ब्रिट्स
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उनकी पेट और कोख में कई टांके लगे, बहुत खून भी बहा लेकिन ब्रिट्स की अंदरूनी ताकत और मजबूत इच्छाशक्ति की वजह से ना सिर्फ वे चल पाई बल्कि कुछ ही सालों बाद खेल में वापसी करने में सफल रहीं।