ओलंपिक खेलों में पदक जीतना अपने आप में बड़ी सफलता मानी जाती है, लेकिन अगर कोई खिलाड़ी अगले ओलंपिक में भी पदक जीत जाए तो क्या कहने। बीजिंग 2008 में हुए ओलंपिक गेम्स में पदक जीतने वाले सुशील कुमार ने लंदन ओलंपिक (2002) में पदक जीता था। जबकि निशानेबाज अभिनव बिंद्रा और मुक्केबाज विजेंदर सिंह यह मौका लंदन में अपनी सफलता को दोहरा नहीं सके।
इतिहास दोहराने का मौका, दूसरी बार पदक जीतने को बेताब ये भारतीय
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रियो ओलंपिक
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पिछली बार की तरह इस बार भी कुछ भारतीय खिलाड़ी ऐसे हैं जिनके पास दूसरी बार ओलंपिक में पदक जीतने का मौका है। जानते हैं उन खिलाड़ियों को जो दूसरी बार भी पदक के दावेदार हैं और अपने खेल में देश को पदक दिला सकते हैं। जानते हैं ऐसे खिलाड़ियों और टीम को जो एक बार फिर देश के लिए पदक जीत सकते हैं।
इतिहास दोहराने का मौका, दूसरी बार पदक जीतने को बेताब ये भारतीय
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अभिनव बिंद्रा
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अभिनव बिंद्रा ने 2008 में निशानेबाजी के 10 मीटर एयर रायफल में शानदार प्रदर्शन करते हुए व्यक्तिगत स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था। वह ऐसा करने वाले भारत के पहले खिलाड़ी रहे। 2012 के लंदन ओलंपिक्स में वह पदक जीतने से चूक गए। लेकिन इस बार रियो में उनसे पदक जीतने का कारनामा दोहराने का शानदार मौका है।
इतिहास दोहराने का मौका, दूसरी बार पदक जीतने को बेताब ये भारतीय
गगन नारंग भी दूसरी बार ओलंपिक में पदक जीतने के दावेदारों में हैं। पिछली बार उन्होंने 50 मीटर राइफल प्रोन में देश के लिए कांस्य पदक जीता था। इस बार भी उनसे पदक जीतने की आस है।
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साइना नेहवाल
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बैडमिंटन में भारत की सनसनी साइना नेहवाल ने इतिहास रचते हुए कांस्य पदक जीता था, और इस बार भी वह देश के लिए एक और पदक जीत सकती हैं।