कॉमनवेल्थ खेलों में भारत को दूसरा गोल्ड मेडल जिताने वाली वेटलिफ्टर संजीता चानू को गोल्ड कोस्ट में प्रतियोगिता से पहले बुरी तरह शर्मसार होना पड़ा। पिछले कुछ माह से पीठ की चोट से जूझ रहीं संजीता को दर्द से निजात के लिए कंपटीशन से पहले फीजियो की सख्त जरूरत थी।
टीम मैनेजमेंट ने आयोजकों से गुहार लगाई कि उनका फीजियो स्टेडियम में ही मौजूद है, उसे लिफ्टरों के रेस्ट रूम में जाने की इजाजत दे दी जाए, लेकिन डे पास नहीं होने के चलते उन्हें नहीं जाने दिया गया। नतीजन कोच संजीता को स्टेडियम की लॉबी में ले आए। वहां उन्हें टॉयलेट में ले जाकर टॉवल बिछाकर फीजियो ने मसाज की। इसके बाद संजीता कंपटीशन में हिस्सा लेने लायक हुईं और उन्होंने देश के लिए गोल्ड जीता।
टीम से जुड़े सूत्रों के अनुसार संजीता को वर्ल्ड चैंपियनशिप के दौरान ही पीठ में गंभीर चोट लग गई थी। उसके बाद उनके सभी कंपटीशन बंद हो गए। कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए उन्हें बड़े ध्यान से ट्रेनिंग कराई गई। संजीता जब भी ट्रेनिंग में आती हैं उससे आधे घंटे पहले तक फीजियो को उनकी मसाज करनी होती है।
मेलबर्न में भी ट्रेनिंग के दौरान यही क्रम चल रहा था, लेकिन फीजियो अक्रांत सक्सेना को गेम्स विलेज में प्रवेश नहीं दिए जाने पर संजीता को मसाज और इलाज नहीं मिल पा रहा था। कंपटीशन से ठीक पहले संजीता दबाव में आ गईं और उन्होंने पीठ दर्द की शिकायत की। इसके बाद कोच ने आयोजकों से फीजियों को रेस्ट रूम में भेजने की इजाजात मांगी, लेकिन उन्हें नहीं आने दिया गया।
अक्रांत टिकट लेकर स्टेडियम में आए हुए थे। कोच ने उन्हें लॉबी में आने के लिए कहा वह संजीता को वहीं ले आए और टॉयलेट में ले जाकर उनका इलाज कराया। हालांकि स्नैच की तीन लिफ्टों के बाद संजीता को कंधे में दर्द खड़ा हो गया था, लेकिन कोच ने फीजियो का काम संभालते हुए खुद ही उनके कंधे पर टेपिंग करते हुए उन्हें लिफ्टिंग लायक बनाया तब जाकर संजीता ने देश के लिए गोल्ड मेडल जीता।