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ध्यानचंद एक नजर में: हॉकी के जादूगर के बारे में जानें 5 मुख्य बातें 

Sat, 23 Sep 2017 07:22 PM IST
amarujala.com-presented by: शरद मिश्र
amarujala.com-presented by: शरद मिश्र Updated Sat, 23 Sep 2017 07:22 PM IST
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dhyanchand a great sports poerson recalled on their birth day across the country
ध्यानचंद - फोटो : times of india
हॉकी के जादूगर ध्यानचंद की आज पूरे देश में जयंती मनाई जा रही है। शहरों से लेकर कस्बों तक खिलाड़ियों को सम्मानित कर ध्यानचंद को याद किया जा रहा है। राजधानी दिल्ली में 17 खिलाड़ियों को खेल पुरस्कारों से राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद सम्मानित करेंगे।

14 साल की उम्र में पहली बार हाथ में हॉकी थामी

dhyanchand a great sports poerson recalled on their birth day across the country
ASDAS - फोटो : DAS
इलाहाबाद में 1905 को जन्में ध्यानचंद को बचपन में कुश्ती का शौक था। 14 साल की उम्र में पहली बार हाथ में हॉकी थामी। 1922 में 16 साल की उम्र में पंजाब रेजीमेंट में बतौर सिपाही शामिल हुए और यहीं से उनके बड़े स्तर पर हॉकी खेलने का सफर शुरू हुआ। 

लगातार तीन ओलंपिक गोल्ड मेडल जीता

dhyanchand a great sports poerson recalled on their birth day across the country
ध्यानचंद - फोटो : sdfsd
देश को लगातार तीन बार 1928, 1932 और 1936 के ओलंपिक में गोल्ड मेडल दिला कर ऐतिहासिक उपलब्घि अपने नाम की। करीब 80 साल हो गए पर यह कारनामा अभी तक किसी खिलाड़ी ने अपने खेल में नहीं किया है। 1932 ओलंपिक में लगातार दो मैचों में 12 गोल मारकर देश को स्वर्ण पदक दिलवाया। यह रिकॉर्ड अभी तक कायम है। 
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42 साल तक की उम्र में हॉकी खेली

dhyanchand a great sports poerson recalled on their birth day across the country
ध्यानचंद
1936 ओलंपिक में नंगे पाव दूसरे हॉफ में जर्मनी के खिलाफ उतरे और 8-1 से देश को सुनहरी जीत दिलाई। 42 साल तक की उम्र में हॉकी खेली। कैरियर में करीब 400 गोल किए। उन्होंने अंतिम मैच 1948 में खेला। नीदरलैंड में ध्यानचंद की स्टिक को तोड़कर उसकी जांच की गई। लोगों को आशंका थी कि ध्यानचंद की स्टिक में चुंबक हो सकता है। उनकी बॉल टेकिंग तथा ड्रिफ्टिंग की असाधारण क्षमता की वजह से ऐसी जांच की गई थी। 
 
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बेटे अशोक कुमार ने भी 1975 में विश्व कप का खिताब दिलाया

ध्यानचंद
ध्यानचंद के बेटे अशोक कुमार ने भी देश की तरफ हॉकी खेली। अशोक कुमार ने अपने पिता की तरह ही इस देश में हॉकी के सुनहरे दिन लौटाए। अशोक कुमार की वजह से भारत ने 1975 के हॉकी विश्व कप में जीत हासिल कर दुनिया में फिर से अपना दबदबा कायम किया। हॉकी में पहली बार विश्व कप जीत कर अशोक कुमार पिता ध्यानचंद की तरह प्रतिष्ठित हो गए। 

ध्यानचंद को भारत रत्न दिलाने के लिए हस्ताक्षर करें यहां - https://goo.gl/6m2fWP
 
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