ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए बहुप्रतीक्षित मुक्केबाजी मुकाबले में भारतीय मुक्केबाज जादुमणि सिंह मांडेंगबाम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पाकिस्तान के सुमामा रहमान को एकतरफा अंदाज में 5-0 से हराकर पुरुषों के 55 किग्रा वर्ग के क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली। खास बात यह रही कि यह मुकाबला 26 जुलाई, यानी कारगिल विजय दिवस के दिन खेला गया। जीत के बाद जादुमणि ने अपना यह शानदार प्रदर्शन कारगिल युद्ध के वीर जवानों को समर्पित कर दिया।
पाकिस्तानी मुक्केबाज पर पूरी तरह हावी रहे जादुमणि
- 22 वर्षीय जादुमणि शुरुआत से ही लय में नजर आए। उन्होंने आक्रामक और सटीक मुक्कों से पाकिस्तान के सुमामा रहमान को कोई मौका नहीं दिया।
- पांचों जजों ने भारतीय मुक्केबाज के पक्ष में फैसला सुनाया और उन्हें 5-0 के सर्वसम्मत निर्णय से विजेता घोषित किया।
- इससे पहले जादुमणि ने राउंड ऑफ 32 में स्कॉटलैंड के आरोन कुलेन को भी 5-0 से हराकर अपनी शानदार फॉर्म का परिचय दिया था।
- लगातार दूसरी एकतरफा जीत के साथ उन्होंने अंतिम-8 में जगह बना ली। अब वह पदक पक्का करने से एक जीत दूर हैं।
'यह जीत कारगिल के वीरों को समर्पित है'
मुकाबले के बाद जादुमणि ने कहा कि पाकिस्तान के खिलाफ जीत उनके लिए खास रही और वह इसे देश के उन वीर सैनिकों को समर्पित करना चाहते हैं जिन्होंने कारगिल युद्ध में सर्वोच्च बलिदान दिया। उन्होंने कहा, 'मैं अपनी यह जीत कारगिल के वीरों को समर्पित करता हूं। पाकिस्तान के खिलाफ जीत हासिल करके मुझे बहुत अच्छा लगा। अब मैं क्वार्टर फाइनल में इससे भी बेहतर प्रदर्शन करूंगा और भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतकर लौटूंगा।'
अब पदक से सिर्फ एक जीत दूर
जादुमणि अब मंगलवार को क्वार्टर फाइनल मुकाबले में उतरेंगे। यदि वह यह मुकाबला जीत लेते हैं तो सेमीफाइनल में पहुंच जाएंगे। राष्ट्रमंडल खेलों की मुक्केबाजी स्पर्धा में दोनों सेमीफाइनल में हारने वाले खिलाड़ियों को कांस्य पदक मिलता है। ऐसे में क्वार्टर फाइनल जीतते ही जादुमणि का कम से कम एक पदक पक्का हो जाएगा।
पिछले साल नोएडा में आयोजित विश्व बॉक्सिंग कप फाइनल्स में 50 किग्रा वर्ग का रजत पदक जीतने वाले जादुमणि इस बार 55 किग्रा वर्ग में खेल रहे हैं और अब तक उनका प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा है। भारत की मुक्केबाजी टीम को उनसे स्वर्ण पदक की उम्मीदें हैं। जिस आत्मविश्वास के साथ उन्होंने पाकिस्तान के मुक्केबाज को हराया और जिस जोश के साथ कारगिल के वीरों को अपनी जीत समर्पित की, उसने इस जीत को सिर्फ खेल तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे देशभक्ति और सम्मान की भावना से भी जोड़ दिया।