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ऐतिहासिक: ओलंपिक में दिखी भारतीय महिला शक्ति, बेटियों ने पहली बार लगाई हैट्रिक

Mon, 09 Aug 2021 08:59 AM IST
Rajeev Rai स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Rajeev Rai Updated Mon, 09 Aug 2021 08:59 AM IST
सार

  • भारतीय महिला खिलाड़ियों ने अपने शानदार खेल से ओलंपिक की अपनी 69वीं सालगिरह को बना दिया यादगार 
  • 45 फीसदी भागीदारी रही बेटियों की टोक्यो में भारत की ओर से जीते गए पदकों में 

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Indian female athletes shine in tokyo olympics, 1st time win three medals
मीराबाई चानू, पीवी सिंधु, लवलीना बोरगेहेन - फोटो : amar ujala

नई उम्मीदों के उजियारे के साथ खेलों के सबसे बड़े महाकुंभ का रविवार को रंगबिरंगी रोशनी के साथ टोक्यो में समापन हो गया। चांदी की चमक के साथ खेलों की शुरुआत करने वाले भारतीय खिलाड़ियों ने स्वर्णिम आभा के साथ इनका अंत किया। पहली बार भारतीय खिलाड़ियों ने सात पदक जीतकर इन खेलों को यादगार बना दिया। मीराबाई ने पहले दिन ही चांदी से देश को रोशन कर दिया तो समापन से एक दिन पहले नीरज चोपड़ा के सोने से पूरा भारत चमक उठा। बेटियों ने ओलंपिक खेलों की अपनी 69वीं सालगिरह को यादगार बना डाला। पहली बार बेटियों ने किसी ओलंपिक में पदक की हैट्रिक लगाई। कुछ ने अपने चमत्कारिक खेल से भविष्य की नई उम्मीद जगाई। याद रहे भारतीय महिलाओं ने पहली बार 1952 हेलसिंकी में भाग लिया था और यह खेल भी जुलाई-अगस्त में ही हुए थे। 

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मीराबाई चानू - फोटो : PTI

मीरा ने दिखाई नई राह : 
मीराबाई चानू (49 किग्रा) ने पहले ही दिन रजत पदक जीतकर भारतीय खेलों में नया अध्याय जोड़ा। पहली बार भारत ने ओलंपिक के पहले ही दिन पदक जीतकर शुरुआत की वो भी चांदी से। उनके इस पदक ने वेटलिफ्टिंग को तो नया जीवन दिया ही साथ ही बेटियों को भी नई राह दिखायी। उन्होंने 21 साल बाद देश को वेटलिफ्टिंग में पदक दिलाया। उनसे पहले कर्णम मल्लेश्वरी ने 2000 सिडनी ओलंपिक में कांसा जीता था।        

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पीवी सिंधु और कोच पार्क टी सांग - फोटो : social media

सिंधू जैसा कोई नहीं : 
विश्व चैंपियन पीवी सिंधू भले ही पीले तमगे से चूक गईं लेकिन उनके कांसे ने भी इतिहास रच दिया। वह लगातार दो ओलंपिक में पदक जीतने वाली देश की पहली बेटी जबकि कुल दूसरी खिलाड़ी बन गईं। सेमीफाइनल में ताई से हारने के बाद 26 वर्षीय सिंधू ने तीसरे स्थान के लिए हुए मुकाबले में पूरी जानकर टोक्यो खेलों में देश को दूसरा पदक दिलाया। 

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लवलीना बोरगेहेन - फोटो : PTI

रिंग की नई मलिका लवलीना : 
पहली ही बार ओलंपिक में खेलने वाली असम की 23 साल की लवलीना बोरगोहेन (69 किग्रा) भारतीय रिंग की नई मलिका बन गईं। उन्होंने अपने मुक्कों से मुक्केबाजी में नई कहानी लिखी। वह दिग्गज मैरीकॉम के बाद ओलंपिक में पदक जीतने वाली देश की दूसरी बिटिया जबकि कुल तीसरी मुक्केबाज बनीं। मैरी भले ही दूसरा पदक नहीं जीत पाईं लेकिन उन्होंने अपने खेल से सभी का दिल जीत लिया। 

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भारतीय महिला हॉकी टीम - फोटो : twitter@TheHockeyIndia

हॉकी की नई रानियां : 
रानी रामपाल की अगुवाई में महिला हॉकी ने इस खेल में नई जान फूंक दी। तीन मैच हारने के बाद बेटियां जिस तरह से लड़ी और पदक के मुकाबले तक पहुंची वह मिसाल बन गईं। भले ही वह ब्रिटेन से कांस्य पदक के मुकाबले में चूक गईं लेकिन उनकी यह हार किसी विजय से कम नहीं है। किसी ने महिला टीम के सेमीफाइनल तक पहुंचने की उम्मीद भी नहीं की थी। पर उन्होंने अपने हार न माने वाले जज्बे से सभी को अपना मुराद बना लिया।    

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