विदुर जी की गिनती महाभारत के बुद्धिजीवियों में की जाती है। ये अत्यंत कुशाग्र बुद्धि के होने के साथ ही अत्यंत सरल स्वभाव के थे। इनके पिता ऋषि वेदव्यास थे, जो रानी सत्यवती के पुत्र थे। इस नाते ये कौरवों और पांडवों के काका थे परंतु एक दासी के गर्भ से जन्म होने के कारण वह राजा नहीं बन सके लेकिन धृतराष्ट्र महत्वपूर्ण मसलों पर विदुर जी की राय लेते थे। महात्मा विदुर की नीतियां आज भी उतना ही औचित्य रखती हैं। विदुर नीति में ऐसे लोगों के बारे में बताया गया है जिनकी संगति में कभी नहीं रहना चाहिए, क्योंकि यह लोग खुद के साथ दूसरों का भी जीवन बर्बाद कर देते हैं।
Vidur Niti: तुरंत छोड़ देनी चाहिए इन लोगों की संगति, स्वयं के साथ आपका भी करते हैं नुकसान
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: Shashi Shashi
Updated Thu, 15 Apr 2021 06:55 AM IST
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