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चाणक्य नीति: इस तरह के धन का हो जाता है नाश, जानिए क्या कहती है चाणक्य नीति

Wed, 17 Mar 2021 02:12 PM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Shashi Shashi Updated Wed, 17 Mar 2021 02:12 PM IST
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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media

किसी भी व्यक्ति के लिए आज के दौर में छोटी से छोटी आवश्यकता के लिए धन की जरूरत होती है। आज के भौतिकवादी समय में तो धन का महत्व और भी ज्यादा बढ़ गया है। आचार्य चाणक्य ने भी नीतिशास्त्र में धन से संबंधित महत्वपूर्ण बातों का जिक्र किया है। आचार्य चाणक्य अर्थशास्त्र के मर्मज्ञ थे, इसलिए मनुष्य के जीवन में वे धन की महत्वता को भलिभांति समझते थे। चाणक्य के अनुसार जीवन को सरल और सुगम बनाने के लिए धन आवश्यक होता है, परंतु चाणक्य कहते हैं कि कुछ धन ऐसा भी होता है जो बहुत ही जल्दी नष्ट हो जाता है। 

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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media

गलत कार्यों से कमाया गया धन
आचार्य चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति के  जीवन में धन आवश्यक होता है परंतु उसे कभी गलत तरीको से धन नहीं कमाना चाहिए। ऐसा धन ज्यादा दिनों तक नहीं टिकता है। गलत कार्यों के द्वारा कमाए गए धन का जल्दी ही नाश हो जाता है। गलत कार्यों या फिर किसी को पीड़ा देकर या फिर धर्म के विरूद्ध कमाए गए धन के कारण व्यक्ति परेशानियों से घिर जाता है साथ ही मान-सम्मान की हानि भी होती है। धन वही श्रेष्ठ होता है जो मेहनत से कमाया जाए। 

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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media

एक ही जगह रखा गया धन
चाणक्य कहते हैं कि जो व्यक्ति धन को केवल एकत्रित करके रखता है, उसका धन धीरे-धीरे नष्ट होने लगता है। धन की वृद्धि के लिए उसे सही प्रकार से निवेश करना आवश्यक होता है। इसी तरह से दूसरों के पास रखा हुआ धन भी समय पड़ने पर व्यक्ति के किसी काम नहीं आता है। 

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आचार्य चाणक्य - फोटो : Social media

धन का अत्यधिक उपभोग
नीतिशास्त्र के अनुसार मनुष्य को धन का उपभोग सदैव सोच-समझकर करना चाहिए। जो लोग धन का अत्यधिक उपभोग करते हैं। उनका धन बहुत ही जल्दी नष्ट हो जाता है और समय पड़ने पर व्यक्ति को दूसरों के आगे हाथ फैलाना पड़ता है, इसलिए बुरे समय के लिए धन का संचयन करके रखना भी आवश्यक होता है। जितनी आवश्यकता हो व्यक्ति को उतना ही धन व्यय करना चाहिए। 

 

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