आज 11 सितंबर है। यह तारीख हमेशा सभी भारतीयों के लिए खास और गर्व करने का दिन है। दरअसल आज ही के दिन महान युवा विचारक और आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद ने अमेरिका के शिकागो शहर में विश्व धर्म संसद में शामिल होकर हिंदू धर्म और दर्शन पर भाषण देकर भारत को विश्व पटल पर एक नई पहचान दी। स्वामी विवेकानंद ने इस भाषण के जरिए भारत की आध्यात्मिक और दर्शन का परिचय पूरे विश्व को करवाया। अपने संक्षिप्त भाषण में स्वामी विवेकानंद हिंदू धर्म के विराट, वैभव और दार्शनिक संपदा को बहुत ही आकर्षक तरीके से पश्चिम की संस्कृति को सामने रखा। आइए जानते हैं विश्व धर्म संसद में उनका भारत से शिकागो तक का सफर...
विवेकानंद के शिकागो में दिए गए ऐतिहासिक भाषण के 126 सालः जब दुनिया ने पहचाना भारत को
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शिकागो यात्रा के लिए स्वामी विवेकानंद के शिष्यों ने सारी व्यवस्था की जिम्मेदारी ली। इसके लिए उन्होंने चंदा मांगकर पैसे एकत्रित किया लेकिन स्वामी विवेकानंद ने धन लेने से इंकार कर दिया था। बाद विवेकानंद की अमेरिका यात्रा का पूरा खर्च राजपूताना के खेतड़ी नरेश ने उठाया था।
शिकागो के विश्व धर्म सम्मेलन में हिस्सा लेने के समय उनकी आयु मात्र 25 साल की थी। शिकागो में भाषण देने से पहले उन्होंने पैदल ही पूरे भारत की यात्रा की। 31 मई 1893 को मुंबई से अपनी विदेश यात्रा शुरू की। पहले वह जापान पहुंचे। जापान के कई शहरों का दौरा किया। इसके बाद वह चीन और कनाडा होते हुए अमेरिका के शिकागो शहर में पहुंचे थे
शिकागो में भाषण के अंश...
अमरीकी भाइयों और बहनों,
आपने जिस स्नेह के साथ मेरा स्वागत किया है उससे मेरा दिल भर आया है। मैं दुनिया की सबसे पुरानी संत परंपरा और सभी धर्मों की जननी की तरफ से धन्यवाद देता हूं। सभी जातियों और संप्रदायों के लाखों-करोड़ों हिंदुओं की तरफ से आपका आभार व्यक्त करता हूं। मैं इस मंच पर बोलने वाले कुछ वक्ताओं का भी धन्यवाद करना चाहता हूं जिन्होंने यह जाहिर किया कि दुनिया में सहिष्णुता का विचार पूरब के देशों से फैला है।
मुझे गर्व है कि मैं उस धर्म से हूं जिसने दुनिया को सहिष्णुता और सार्वभौमिक स्वीकृति का पाठ पढ़ाया है। हम सिर्फ़ सार्वभौमिक सहिष्णुता पर ही विश्वास नहीं करते बल्कि, हम सभी धर्मों को सच के रूप में स्वीकार करते हैं। मुझे गर्व है कि मैं उस देश से हूं जिसने सभी धर्मों और सभी देशों के सताए गए लोगों को अपने यहां शरण दी।