{"_id":"59fb74564f1c1ba7678b9087","slug":"why-people-gose-to-garhmukteshwar-temple-in-kartik-purnima","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"कार्तिक पूर्णिमा पर गढ़मुक्तेश्वर में क्यों करते हैं स्नान, जानिए इसके फायदे","category":{"title":"Religion","title_hn":"धर्म","slug":"religion"}}
कार्तिक पूर्णिमा पर गढ़मुक्तेश्वर में क्यों करते हैं स्नान, जानिए इसके फायदे
amarujala.com- presented by: शारुख खान
Updated Fri, 03 Nov 2017 08:07 AM IST
विज्ञापन
kartik purnima
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कार्तिक मास की पूर्णिमा का शास्त्रों में बड़ा महत्व बताया गया है। शैव भक्तों में इस पूर्णिमा का महत्व इसलिए है क्योंकि इसी दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक महाबलशाली असुर का वध किया था।
दोहरघाट स्थित सरयू नदी के तट पर कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान करते श्रद्घालु।
इससे देवगण बहुत प्रसन्न हुए और भगवान विष्णु ने शिव जी को त्रिपुरारी नाम दिया जो शिव के अनेक नामों में से एक नाम है। लेकिन कार्तिक पूर्णिमा का विशेष महत्व वैष्णव भक्तों के लिए है क्योंकि प्रलयकाल में कार्तिक पूर्णिमा के दिन ही भगवान विष्णु ने पहला अवतर लिया था जिसे मत्स्य अवतार के नाम से जाना जाता है।
STEP Hrki in Haridwar on Sunday on the occasion of Kartik Purnima bathing devotees take dip in the Ganges.
- फोटो : amarujala
इस अवतार में भगवान विष्णु ने वेदों की रक्षा की और प्रलय के अंत तक सप्तऋषियों, अनाजों एवं राजा सत्यव्रत की रक्षा की। इससे पुनः सृष्टि का निर्माण करना आसान हुआ। शास्त्रों में कार्तिक पूर्णिम के दिन दिन गंगा स्नान का बड़ा महत्व बताया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
फाइल
माना जाता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन गंगा स्नान करने से पूरे वर्ष गंगा स्नान करने का फल मिलता है। इस दिन गंगा के पवित्र नदियों एवं तीर्थों में स्नान का भी बहुत महत्व है। यमुना, गोदावरी, नर्मदा, गंडक, कुरूक्षेत्र, अयोध्या, काशी में स्नान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
विज्ञापन
फाइल
इस दिन गढ़मुक्तेश्वर में स्नान करना उत्तम फलदायी माना गया है। मान्यता है कि महाभारत युद्घ समाप्त होने के बाद अपने परिजनों के शव को देखकर युधिष्ठिर बहुत शोकाकुल हो उठे। पाण्डवों को शोक से निकालने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने गढ़ मुक्तेश्वर में आकर इसी दिन मृत आत्माओं की शांति के लिए यज्ञ और दीपादन किया।