{"_id":"5798779e4f1c1b327d21eff6","slug":"types-of-kanwar-yatra","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"कांवड़ यात्रा के बारे में यह 7 बातें कम ही लोग जानते हैं, देखिए आप कितना जानते हैं","category":{"title":"Religion","title_hn":"धर्म","slug":"religion"}}
कांवड़ यात्रा के बारे में यह 7 बातें कम ही लोग जानते हैं, देखिए आप कितना जानते हैं
Wed, 27 Jul 2016 02:54 PM IST
रेणु जैन
रेणु जैन
Updated Wed, 27 Jul 2016 02:54 PM IST
विज्ञापन
1 of 7
kanwar yatra
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
भोलेनाथ के भक्त यूं तो सालों भर कांवड़ चढ़ाते रहते हैं लेकिन सावन में इसकी धूम कुछ ज्यादा ही रहती है क्योंकि यह महीना है भगवान शिव को समर्पित। और अब तो कांवड़ सावन महीने की पहचान बन चुका है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि शिव जी सबसे पहले कांवड़ किसने चढ़ाया और इसकी शुरुआत कैसे हुई। कुछ कथाओं के अनुसार भगवान परशुराम ने अपने आराध्य देव शिव के नियमित पूजन के लिए पूरा महादेव में मंदिर की स्थापना की और कांवड़ में गंगाजल लाकर पूजन किया। वहीं से कांवड़ यात्रा की शुरूआत हुई जो आज भी देश भर में प्रचलित है।
कांवड़ यात्रा का वैज्ञानिक महत्व
2 of 7
kanwar yatra
कांवड़ यात्रा का धार्मिंक महत्व तो जगजाहिर है लेकिन इस कांवड़ यात्रा को वैज्ञानिकों ने उत्तम स्वाास्थ्य से भी जोड़ दिया है। प्रकृति के इस खूबसूरत मौसम में जब चारों तरफ हरियाली छाई रहती है तो कांवड़ यात्री भोलेनाथ को जल चढ़ाने के लिए पैदल चलते हैं। पैदल चलने से हमारे आसपास के वातावरण की कई चीजों का सकारात्मक प्रभाव हमारे मनमस्तिष्क पर पड़ता है। चारों तरफ फैली हरियाली आंखों की रोशनी बढ़ाती है । वहीं ओस की बूँदें नंगे पैरों को ठंडक देती हैं तथा सूर्य की किरणें शरीर को रोगमुक्त बनाती हैं।
कांवड़ यात्री केसरिया वस्त्र क्यों धारण करते हैं
3 of 7
kanwar yatra
कांवड़ यात्रा लंबी तथा कठिन होती है लेकिन लक्ष्य एक ही होता है कि महादेव को जल चढ़ाना है । व्यक्ति को इस लम्बी यात्रा के दौरान आत्मनिरीक्षण करने का मौका मिलता है। इस धार्मिक यात्रा की विशेषता यह भी है कि सभी कांवड़ यात्री केसरिया रंग के वस्त्र ही धारण करते हैं। केसरिया रंग जीवन में ओज, साहस, आस्था और गतिशीलता बढ़ाता है। कलर-थैरेपी के अनुसार यह रंग पेट की बीमारियों को दूर भगाता है। सारे कांवड़ यात्री बोल बम के सम्बोधन से एक-दूसरे का मनोबल बढ़ाते हैं। ये यात्री रास्ते भर एक-दूसरे से वार्तालाप करते चलते हैं। रास्ते में छोटे-बड़े गाँव, शहरों से गुजरते हैं तो स्थानीय लोग भी इन कांवड़ यात्रियों का स्वागत करते हैं। कांवड़ यात्रा में कांवड़ के भी विभिन्न रूप होते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
झूला कांवड़
4 of 7
officer meeting for kanwar yatra
एक बाँस पर दोनों ओर झूले के आकार को साधते हुए कांवड़ बनाई जाती है। गंगाजल वाले मटके या पात्र दोनों ओर बराबरी से लटके होते हैं । कांवड़ियों द्वारा विश्राम या भोजन के समय इस कांवड़ को जमीन पर नहीं रखा जाता । पेड़ या किसी अन्य स्थान पर इसे टांग दिया जाता है।
विज्ञापन
खड़ी कांवड़
5 of 7
कांवड़ यात्रा
खड़ी कांवड़ - खड़ी कांवड़ को कन्धे पर ही रखा जाता है। इसे न तो जमीन पर रख सकते हैं ना ही टांगते हैं। यदि कांवड़ियों को विश्राम या भोजन करना हो तो इसे किसी अन्य शिव सेवक को देना पड़ता है। यह कांवड़ यात्रा बहुत कठिन होती है।
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें
Next Article
Disclaimer
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।