फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

साल की पहली एकादशी, जानिए इस व्रत के फायदे

Sun, 08 Jan 2017 01:33 PM IST
राकेश्ा झा/टीम डिजिटल
राकेश्ा झा/टीम डिजिटल Updated Sun, 08 Jan 2017 01:33 PM IST
विज्ञापन
story and importance of putrada ekadashi 2017
व‌िष्‍णु

पौष मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी इस साल 8 जनवरी को है। पद्म पुराण में इस एकादशी को पुत्रदा एकादशी कहा गया है। मान्यता है क‌ि इस एकादशी के पुण्य से संतान सुख की प्राप्त‌ि होती है। पद्म पुराण में इस एकादशी का महत्व बताते हुए भगवान श्री कृष्‍ण युध‌िष्ठ‌िर से कहते हैं क‌ि इस व्रत के देवता श्री नारायण हैं।



जो व्यक्ति संतान सुख की इच्छा रखता है उसे पौष मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी का व्रत रखना चाहिए। इस एकादशी का पुण्यफल संतान के भाग्य और कर्म को उत्तम बनाने में सहायक माना गया है।

साल की पहली एकादशी, जान‌िए इस व्रत के फायदे

story and importance of putrada ekadashi 2017
व‌िष्‍णु

व्रत रखने वाले को दशमी के दिन लहसुन, प्याज से रहित शुद्घ भोजन करना चाहिए। एकादशी के दिन प्रातः स्नानादि से निवृत होकर श्री नारायण की भक्ति पूर्वक पूजा करनी चाहिए और दीपदान करना चाहिए। व्रत रखने वाले को दशमी के दिन से ही मन और वचन से ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए भगवान का ध्यान करते हुए अपना काम करना चाहिए।

साल की पहली एकादशी, जान‌िए इस व्रत के फायदे

story and importance of putrada ekadashi 2017
व‌िष्‍णु

जो व्यक्ति यह व्रत रखता है उसे एकादशी के दिन पूरे दिन निराहार रहना होता है। शाम को चाहें तो फलाहार कर सकते हैं। द्वादशी के दिन ब्राह्मण को भोजन करवाकर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद स्वयं भोजन करें ऐसा न‌ियम है। द्वादशी के दिन भी व्रती को सात्विक भोजन करना चाह‌िए। इस प्रकार नियमपूर्वक जो लोग पुत्रदा एकादशी का व्रत करते हैं उनका व्रत ही सफल होता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

साल की पहली एकादशी, जान‌िए इस व्रत के फायदे

story and importance of putrada ekadashi 2017
भगवान विष्णु

पुत्रदा एकादशी व्रत की कथा इस प्रकार है, एक समय भद्रावतीपुरी में राजा सुकेतुमान राज्य करते थे। उनकी रानी का नाम चम्पा था। विवाह के काफी समय बाद भी पति-पत्नी संतान सुख से वंचित थे। एक दिन दुःखी होकर राजा सुकेतुमान किसी से कुछ बताये बिना वन चले गये। वन में इन्हें एक सुन्दर सरोवार के पास कुछ मुनि दिखाई पड़े। राजा मुनियों के पास पहुंचे और उन्हें प्रणाम किया। मुनियों ने बताया कि वह विश्वदेव हैं।

विज्ञापन

साल की पहली एकादशी, जान‌िए इस व्रत के फायदे

story and importance of putrada ekadashi 2017
व‌िष्‍णु
राजा ने विश्वदेव से संतानहीनता का दुःख बताया और इसका उपचार पूछा। मुनियों ने राजा से कहा कि आपने बड़े ही शुभ दिन पर यह प्रश्न किया है, आज पौष शुक्ल एकादशी तिथि है। इस एकादशी का नाम पुत्रदा एकादशी है। इस व्रत के पुण्य से सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है। इसके बाद मुनियों द्वारा बताये गये विधि से राजा ने पुत्रदा एकादशी व्रत रखा। इसके पुण्य से कुछ समय बाद रानी चम्पा गर्भवती हुई और एक नियत समय पर सुन्दर पुत्र को जन्म दिया। बड़ा होकर राजा का यह पुत्र धर्मात्मा और प्रजापालक हुआ।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed