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Sindhara Dooj 2024: कब है सिंधारा दूज? जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और उससे जुड़े अचूक उपाय

Sat, 03 Aug 2024 06:51 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Sat, 03 Aug 2024 06:51 AM IST
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Sindhara Dooj 2024 Know Date Time Muhurat upay and importance of Sindhara Dauj
सिंधारा दूज 2024 - फोटो : amar ujala

Sindhara Dooj 2024 Date: सिंधारा दूज प्रत्येक वर्ष श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि पर मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार, सिंधारा दूज का त्योहार जुलाई के मध्य से अगस्त के मध्य तक मनाया जाता है। हिंदी कैलेंडर और पंचांग के अनुसार, इस दिन को बहुत शुभ माना जाता है और भारत के उत्तरी राज्यों में इसे बहुत उत्साह और जोश के साथ मनाया जाता है। सिंधारा दूज मुख्य रूप से महिलाओं का त्यौहार है, जिसमें वे एक-दूसरे को उपहार देती हैं। इसे 'सौभाग्य दूज', 'प्रीति द्वितीया', 'स्थान्य वृद्धि' या 'गौरी द्वितीया' जैसे अन्य नामों से भी जाना जाता है। इस बार यह पर्व 6 अगस्त को मनाया जाएगा और इसके बाद ही हरियाली तीज मनाई जाएगी। यह पर्व सावन मास में मनाया जाता है। आइए जानते हैं सिंधारा  दूज की तिथि शुभ मुहूर्त महत्व और इससे जुड़े उपाय। 

Sindhara Dooj 2024 Know Date Time Muhurat upay and importance of Sindhara Dauj
सिंधारा दूज 2024 - फोटो : अमर उजाला

श्रावण मास तिथि 
श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि आरंभ: 05 अगस्त, सोमवार सायं 6:04 मिनट से 
श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि समाप्त: 06 अगस्त, रात्रि 07:52 मिनट पर 
उदयातिथि के अनुसार सिंधारा दूज 6 अगस्त को मनाई जाएगी। 

Sindhara Dooj 2024 Know Date Time Muhurat upay and importance of Sindhara Dauj
सिंधारा दूज 2024 - फोटो : istock

पूजा शुभ मुहूर्त 

  • ब्रह्म मुहूर्त: प्रातः 04: 21 से 05:03 तक 
  • प्रातः सांध्य: प्रातः 04:42 से 05:45 तक 
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 से 12:54 तक 
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 03:41 से 03:34 तक 
  • अमृत काल, दोपहर 03:06 से 04:51 तक 
  • गोधूलि मुहूर्त: सायं 07:08 से 07:29 टल 
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Sindhara Dooj 2024 Know Date Time Muhurat upay and importance of Sindhara Dauj
सिंधारा दूज 2024 - फोटो : istock

क्या है सिंधारा दूज ?
सिंधारा दूज हरियाली तीज के एक दिन पूर्व आता है। इस दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा के साथ पूरे विधि विधान से गौरी पूजा भी की जाती है। सिंधारा दूज को गौरी द्वितीया, सौभाग्य दूज या स्थान्य वृद्धि के नाम से भी जाना जाता है। दरअसल मुख्य रूप से यह नव वधुओं या बहुओं का पर्व माना जाता है। इस दिन सास अपनी बहुओं को उपहार देती हैं। सिंधारा दूज के दिन बहूएं अपने माता-पिता द्वारा दिया गया बायना लेकर ससुराल वापस आती है। शाम को गौरी माता/देवि पार्वती की पूजा करने के बाद वह अपनी सास को मायके से लाया हुआ बायना देती है।

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Sindhara Dooj 2024 Know Date Time Muhurat upay and importance of Sindhara Dauj
सिंधारा दूज 2024 - फोटो : iStock

सिंधारा दूज पर उपाय 

  • सिंधारा दूज पर गररेबों को गुड़ दान करने से आर्थिक समस्या दूर होती है। 
  • सिंधारा दूज के दिन किसी गरीब को सफेद रंग के वस्त्र दान करने से जीवन में सुख समृद्धि बनी रहती है। इसके साथ ही चंद्र देव और भगवान शिव की भी कृपा मिलती है। 
  • विवाहित महिलाएं सिंधारा दूज पर मंदिर से चढ़ाया हुआ सिंदूर अपनी मांग में  लगाएं तो पति की दीर्घायु होती है। 
  • सिंधारा दूज पर महिलाएं मंदिर जाकर माता पार्वती को 16 शृंगार अर्पित करती हैं और पति की लंबी आयु की कामना करती हैं। 
  • सिंधारा दूज के दिन चावल और दूध से बनी खीर का दान करना  शुभ माना जाता है। इससे जीवन में आ रही बाधा दूर होती है और सफलता के रास्ते खुलते हैं। 
     
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