शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के दिव्य स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है। आज यानी 13 अक्तूबर 2026, मंगलवार को भक्त मां चंद्रघंटा की आराधना कर सुख-समृद्धि, शांति और साहस की कामना करेंगे। देवी के मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र विराजमान है, इसी कारण उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा की उपासना से भय दूर करने और आत्मविश्वास बढ़ाने की प्रेरणा मिलती है। आइए जानते हैं नवरात्रि के तीसरे दिन का शुभ मुहूर्त, मां चंद्रघंटा की पूजा विधि, प्रिय भोग, मंत्र और पौराणिक कथा।
नवरात्रि का तीसरा दिन आज, कैसे करें मां चंद्रघंटा की पूजा? जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, भोग, मंत्र और कथा
Shardiya Navratri 2026 Day 3: शारदीय नवरात्रि का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा को समर्पित है। 13 अक्तूबर को मां चंद्रघंटा की पूजा की जाएगी। यहां जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि, प्रिय भोग, मंत्र और पौराणिक कथा।
मां चंद्रघंटा का स्वरूप क्यों है खास?
नवदुर्गा के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा को शक्ति, शौर्य और शांति का प्रतीक माना जाता है। उनके मस्तक पर अर्धचंद्र घंटे के आकार में सुशोभित होता है। देवी सिंह पर सवार रहती हैं और उनके दस हाथों में अलग-अलग अस्त्र-शस्त्र होते हैं। उनका दिव्य स्वरूप भक्तों को निर्भयता, धर्म की रक्षा और अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का संदेश देता है। मान्यता है कि नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा करने से जीवन में सकारात्मकता आती है। भक्त देवी से परिवार की खुशहाली, मानसिक शांति और अपने कार्यों में सफलता की प्रार्थना करते हैं।
शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, आश्विन शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 12 अक्तूबर 2026 की रात 10 बजकर 13 मिनट पर शुरू हुई और 13 अक्तूबर की रात 11 बजकर 27 मिनट पर समाप्त होगी। इस दिन अभिजीत मुहूर्त और अमृत काल में पूजा-अर्चना करना शुभ माना गया है।
- तृतीया तिथि प्रारंभ: 12 अक्तूबर, रात 10:13 बजे
- तृतीया तिथि समाप्त: 13 अक्तूबर, रात 11:27 बजे
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक
- अमृत काल: शाम 4:14 बजे से शाम 5:57 बजे तक
ध्यान रखें कि शुभ मुहूर्त में स्थान के अनुसार अंतर हो सकता है। पूजा का समय तय करने से पहले अपने शहर के स्थानीय पंचांग से पुष्टि कर लें।
मां चंद्रघंटा की पूजा कैसे करें?
- नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा घर पर भी सरलता से की जा सकती है।
- पूजा के दौरान स्वच्छता और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखें।
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थल को साफ करें।
- मां दुर्गा के सामने दीपक जलाकर मां चंद्रघंटा का ध्यान करें। अपनी परंपरा के अनुसार व्रत या पूजा का संकल्प लें।
- देवी को लाल या पीले फूल अर्पित करें। इसके बाद कुमकुम, अक्षत, धूप और दीप से पूजा करें।
- मां चंद्रघंटा को दूध, खीर, फल या अन्य सात्विक मिठाइयों का भोग लगाएं।
- पूजा के समय मां के मंत्रों का जाप करें। इसके साथ दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ भी कर सकते हैं।
- अंत में मां चंद्रघंटा की आरती करें और परिवार के सुख, शांति व मंगल की कामना करें।
मां चंद्रघंटा को कौन-सा भोग लगाना चाहिए?
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा को दूध और दूध से बने पकवान अर्पित करने की परंपरा है। खीर को देवी का प्रिय भोग माना जाता है। इसके अलावा केसर, इलायची और मेवों से बनी मिठाई भी अर्पित कर सकते हैं। भोग तैयार करते समय साफ-सफाई का ध्यान रखें। पूजा के बाद प्रसाद को परिवार और अन्य भक्तों में बांटें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धापूर्वक अर्पित किया गया भोग देवी के प्रति भक्ति और समर्पण का प्रतीक है।