नवरात्रि मुख्य रुप से शक्ति की आरधना करने के दिन होते हैं। मान्यता के अनुसार, नवरात्रि के नौं दिनों तक मां दुर्गा धरती पर विचरण करती हैं और हर कदम पर अपने भक्तों की विपत्ति से रक्षा करती हैं। माना जाता है कि इन दिनों में नियम और निष्ठा के साथ मां आदिशक्ति के नौं स्वरुपों का पूजन करने से मनुष्य के सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। नवरात्रि के नौं दिनों के दौरान पड़ने वाली अष्टमी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन को दुर्गा अष्टमी या फिर महाअष्टमी कहा जाता है। अष्टमी तिथि को मां के आठवें स्वरुप महागौरी माता के पूजन का विधान है। प्रत्येक वर्ष अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से आरंभ होने वाली नवरात्रि को शारदीय नवरात्रि कहा जाता है। इस बार शारदीय नवरात्रि 07 अक्टूबर 2021 से शुरु हो रही है। तो चलिए जानते हैं कि किस दिन पड़ रही है अष्टमी तिथि और क्या है इस दिन का महत्व व पूजा विधि।
shardiya navratri 2021: इस दिन है नवरात्रि की अष्टमी तिथि, जानिए महत्व, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि
अष्टमी तिथि शुभ मुहूर्त-
इस बार अष्टमी तिथि 13 अक्टूबर 2021 दिन बुधवार को पड़ रही है। इस दिन महगौरी माता का पूजन किया जाएगा।
अष्टमी तिथि आरंभ- 12 अक्टूबर 2021 को रात 09 बजकर 47 मिनट से
अष्टमी तिथि समाप्त- 13 अक्टूबर 2021 को रात 08 बजकर 07 मिनट पर
नवरात्रि में अष्टमी तिथि का महत्व-
नवरात्रि के आठवें दिन यानी अष्टमी तिथि को मां दुर्गा की आठवीं शक्ति महागौरी माता का पूजन किया जाता है। मां पार्वती ने भगवान शिव को पति रुप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी जिसके कारण इनका रंग काला पड़ गया था। भगवान शिव के आशीर्वाद से मां गौर वर्ण की हो गई और महगौरी कहलाई। इनके पूजन से विवाह की बाधाएं भी दूर होती हैं। मां महागौरी की पूजा-आराधना करने से पूर्वसंचित पापकर्म भी नष्ट हो जाते हैं। इस दिन विधिवत पूजन व व्रत करने से सौभाग्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन लोग मां महागौरी का पूजन करने के साथ ही अपने घरों में पंडित जी को बुलाकर हवन अनुष्ठान करवाते हैं। नवरात्रि की अष्टमी तिथि को महाअष्टमी के नाम से भी जाना जाता है।
- इस दिन प्रातः स्नानादि करने के पश्चात पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- इसके बाद मां महागौरी के समक्ष दीपक प्रज्वलित करें।
- अब मां का तिलक करें और उन्हें सफेद पुष्प, फल आदि अर्पित करें।
- एक उपले के टुकड़े की अंगार पर लौंग, कपूर देशी, घी आदि से अग्यारी करें।
- विधिवत पूजन के बाद मां की आरती उतारें और वहीं बैठकर मां का ध्यान करते हुए मंत्र जाप करें।
- यदि आप पूरी नवरात्रि के व्रत रखते हैं तो अष्टमी को हवन करवाना चाहिए।