फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

जानिए शरद पूर्णिमा का महत्व और पूजा विधि

Sat, 05 Oct 2019 08:06 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Sat, 05 Oct 2019 08:06 AM IST
विज्ञापन
sharad purnima importance and puja vidhi
शरद पूर्णिमा
शरद पूर्णिमा पर मंदिरों में विशेष आयोजन किए जाते है। शरद पूर्णिमा की रात को बेहद ही खूबसूरत रात कहा जाता है। मान्यता के अनुसार देवता खुद धरती पर इस रात को देखने के लिए आते है। धार्मिक आस्था है कि शरद पूर्णिमा के दिन आसमान से अमृत की वर्षा होती है।

 
sharad purnima importance and puja vidhi
कार्तिक पूर्णिमा

शरद पूर्णिमा का महत्व
शरद पूर्णिमा के दिन सुबह स्नान करने के बाद ही व्रत प्रारंभ हो जाता है। माताएं अपनी संतान की मंगल कामना के लिए इस दिन देवी-देवताओं का पूजन करती हैं। शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा पृथ्वी के बेहद करीब आ जाता है और इस ऋतु में मौसम साफ रहता है। शरद पूर्णिमा की रात्रि में चंद्र किरणों का शरीर पर पड़ना बहुत ही शुभ माना जाता है।

 

sharad purnima importance and puja vidhi
राध्ााकृष्ण

इस दिन के धार्मिक कर्म इस प्रकार करने से विशेष फल मिलता है।
इस दिन सुबह नहाकर व्रत का संकल्प लें और मान्यता अनुसार इस दिन पवित्र नदी, जलाश्य या कुंड में स्नान करना चाहिए। ऐसा करने से व्रत का लाभ अधिक मिलता है।
भगवान की प्रतिमाओं को सुंदर वस्त्र और आभूषण पहनाएं। भगवान को सजाने के बाद आवाहन, आसन, आचमन, वस्त्र, गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, तांबूल, सुपारी और दक्षिणा आदि अर्पित कर पूजन करें।
  

विज्ञापन
विज्ञापन
sharad purnima importance and puja vidhi
sabu dana kheer recipe

गाय के दूध से बनी खीर में चीनी मिलाकर आधी रात के समय भगवान को भोग लगाएं। रात्रि में जब चंद्रमा आकाश के मध्य में स्थित हो तब चंद्र देव का विधि विधान से पूजन करें और खीर का नेवैद्य अर्पण करें।
  
 

विज्ञापन
sharad purnima importance and puja vidhi
पार्वती और शिव - फोटो : google

इस दिन भगवान शिव-पार्वती और कार्तिकेय की भी पूजा होती है। भगवान को भोग लगाने के बाद रात को खीर से भरा बर्तन चांदनी रात में बाहर रख दें और दूसरे दिन उसे ग्रहण करें। इस दिन पूर्णिमा व्रत कथा सुननी चाहिए। कथा से पूर्व एक लोटे में जल और गिलास में गेहूं, पत्ते के दोने में रोली व चावल रखकर कलश की वंदना करें और दक्षिणा चढ़ाएं। इस दिन भगवान शिव-पार्वती और भगवान कार्तिकेय की भी पूजा होती है।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed