आस्था: शिव भक्तों को भगवान भोले की पूजा में नहीं करनी चाहिए ऐसी 7 गलतियां
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शंख का प्रयोग
हिंदू धर्म में हर शुभ काम और पूजा-पाठ में शंख का प्रयोग शुभ माना जाता है लेकिन भगवान शिव की पूजा में शंख का इस्तेमाल वर्जित माना गया। दरअसल इसके पीछे एक कथा है जिसके अनुसार भगवान शिव ने शंखचूड़ नाम के असुर का वध किया था, जो भगवान विष्णु का अनन्य भक्त था। शंख को उसी असुर का प्रतीक माना जाता है। इसलिए भगवान की पूजा में शंख का प्रयोग नहीं किया जाता।
तुलसी के पत्तों का प्रयोग
हिन्दू धर्म में तुलसी के पौधे को बहुत शुभ माना गया है। सभी तरह के शुभ कार्यों में तुलसी के पत्तों का प्रयोग किया जाता है। लेकिन तुलसी के पत्तों को शिवलिंग पर चढ़ाना मना है। दरअसल भगवान शिव ने तुलसी के असुर पति का वध किया कर दिया था। ऐसे में कई बार लोग भूलवश भोलेनाथ की पूजा में तुलसी का इस्तेमाल करते हैं जिस वजह से उनकी पूजा पूरी नहीं मानी जाती।
तिल का प्रयोग
हिन्दू धर्म में तुलसी के पौधे को बहुत शुभ माना गया है। सभी तरह के शुभ कार्यों में तुलसी के पत्तों का प्रयोग किया जाता है। लेकिन तुलसी के पत्तों को शिवलिंग पर चढ़ाना मना है। दरअसल भगवान शिव ने तुलसी के असुर पति का वध किया कर दिया था। ऐसे में कई बार लोग भूलवश भोलेनाथ की पूजा में तुलसी का इस्तेमाल करते हैं जिस वजह से उनकी पूजा पूरी नहीं मानी जाती।
अक्षत
भगवान शिव को अक्षत यानी चावल अर्पित किए जाने के बारे में शास्त्रों में लिखा है। टूटा हुआ चावल अपूर्ण और अशुद्ध होता है इसलिए यह शिवलिंग पर नहीं चढ़ता।