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नवरात्रि के बाद अखंड ज्योति का क्या करें? बची बाती और घी को लेकर जान लें ये जरूरी नियम

Mon, 19 Oct 2026 11:05 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Mon, 19 Oct 2026 11:05 PM IST
सार

नवरात्रि समाप्त होने के बाद अखंड ज्योति की बची हुई बाती और घी का क्या करना चाहिए? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पूजा में इस्तेमाल हुई इन चीजों को लेकर कुछ नियम बताए गए हैं। जानें अखंड ज्योति की बची सामग्री को कैसे संभालें और किन बातों का ध्यान रखें।

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Navratri Akhand Jyot Visarjan Never Throw Away the Leftover Akhand Jyot Wick and Ghee know the niyam
akhand jyoti 1 - फोटो : amar ujala

शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के भक्त नौ दिनों तक घरों और मंदिरों में श्रद्धापूर्वक अखंड ज्योति जलाते हैं। धार्मिक मान्यताओं में अखंड ज्योति को आस्था, शक्ति और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। भक्त मां दुर्गा से परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना करते हैं। नवरात्रि की अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजन, हवन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान पूरे होने के बाद एक सवाल अक्सर मन में आता है कि अखंड ज्योति की बची हुई बाती, घी या तेल और पूजा में इस्तेमाल की गई दूसरी सामग्री का क्या करना चाहिए? इन्हें कहां रखना चाहिए और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है? आइए जानते हैं अखंड ज्योति की बची सामग्री से जुड़ी प्रचलित धार्मिक मान्यताएं और जरूरी सावधानियां।

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Navratri Akhand Jyot Visarjan Never Throw Away the Leftover Akhand Jyot Wick and Ghee know the niyam
अखंड ज्योति की बची हुई बाती का क्या करें? - फोटो : adobe stock

अखंड ज्योति की बची हुई बाती का क्या करें?
नवरात्रि के समापन पर अखंड ज्योति की बाती और उससे जुड़ी पूजा सामग्री को श्रद्धापूर्वक संभालने की परंपरा है। अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में इसे लेकर अलग मान्यताएं हो सकती हैं। कुछ लोग पूजा संपन्न होने के बाद बची हुई बाती को स्वच्छ स्थान पर मिट्टी में दबाते हैं, जबकि कुछ लोग अपने यहां प्रचलित रीति के अनुसार उसका विसर्जन करते हैं। यदि आप अखंड ज्योति की बाती को विसर्जित करना चाहते हैं, तो स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार उचित तरीका अपना सकते हैं। इसके लिए नदी या तालाब में सामग्री डालना जरूरी नहीं है। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए बाती और अन्य जैविक पूजा सामग्री को साफ मिट्टी में दबाना एक व्यावहारिक विकल्प हो सकता है। ध्यान रखें कि अखंड ज्योति की बाती को लेकर किसी एक तरीके को सभी जगह अनिवार्य मानने का आधार नहीं है। इसलिए अपने परिवार की परंपरा और पूजा कराने वाले जानकार की सलाह के अनुसार निर्णय लें। इसे लेकर मन में भय रखने या किसी अनहोनी की आशंका करने की आवश्यकता नहीं है।

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बचा हुआ घी या तेल कैसे इस्तेमाल करें? - फोटो : Adobe Stock

बचा हुआ घी या तेल कैसे इस्तेमाल करें?
अखंड ज्योति में इस्तेमाल किया गया घी या तेल यदि साफ है और उसमें राख, जली हुई बाती के टुकड़े या दूसरी अशुद्धियां नहीं मिली हैं, तो परिवार की धार्मिक परंपरा के अनुसार उसे किसी दूसरे दीपक में इस्तेमाल किया जा सकता है। यदि घी या तेल में कालिख, गंदगी या जले हुए अवशेष मिल गए हों, तो उसका दोबारा उपयोग करने से बचें। नवरात्रि के बाद पूजा स्थल की सफाई करें और दीपक को पूरी तरह ठंडा होने के बाद ही उठाएं। यदि उसमें लौ अभी जल रही है, तो उसे सुरक्षित तरीके से संभालें और बिना निगरानी के न छोड़ें। दीपक में बचा घी या तेल लंबे समय तक खुला न रखें और उसे बच्चों की पहुंच से दूर रखें।

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अखंड ज्योति - फोटो : Adobe Stock

फूल, अक्षत और दूसरी पूजा सामग्री का क्या करें?

  • इस्तेमाल किए गए फूलों और पत्तियों को स्वच्छ मिट्टी में दबाया जा सकता है या उपयुक्त होने पर खाद बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • पूजा में चढ़ाए गए चावल को परिवार की परंपरा के अनुसार संभालें या स्वच्छ स्थान पर मिट्टी में डालें।
  • पीतल या दूसरी धातु के दीपक को साफ करके भविष्य की पूजा में दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • इन्हें पूजा सामग्री के साथ मिट्टी या पानी में न डालें। अलग करके उचित तरीके से निस्तारित करें।
  • पूजा की सामग्री को नदियों, तालाबों या अन्य जलस्रोतों में डालने से प्रदूषण हो सकता है। इसलिए धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण की स्वच्छता का ध्यान रखना भी जरूरी है।
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अखंड ज्योति की पूजा के बाद किन बातों का ध्यान रखें? - फोटो : adobe stock

अखंड ज्योति की पूजा के बाद किन बातों का ध्यान रखें?

अखंड ज्योति जलाते समय सबसे जरूरी बात उसकी सुरक्षा है। दीपक को स्थिर और सुरक्षित स्थान पर रखें, आसपास ज्वलनशील वस्तुएं न रखें और बच्चों तथा पालतू जानवरों की पहुंच से दूर रखें। घी या तेल की मात्रा और बाती की स्थिति पर ध्यान देते रहें। पूजा संपन्न होने के बाद दीपक को संभालते समय सुनिश्चित करें कि लौ पूरी तरह बुझ चुकी हो और पात्र ठंडा हो गया हो। नवरात्रि के बाद बची हुई बाती, घी और दूसरी पूजा सामग्री को लेकर अलग-अलग धार्मिक परंपराएं प्रचलित हैं। इसलिए किसी एक विधि को लेकर डरने के बजाय श्रद्धा, स्वच्छता और सुरक्षा को प्राथमिकता दें। मां दुर्गा की पूजा का भाव भक्ति, सकारात्मकता और सद्भाव है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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