सूर्य जब एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं तो उस दिन को संक्रांति कहा जाता है। जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो उसे मकर संक्रांति कहा जाता है। हर वर्ष मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाती है। इसलिए लोग जगह-जगह खिचड़ी भोज का आयोजन किया जाता है। इस दिन से खरमास समाप्त हो जाता है। इस दिन कुछ कार्यों को करने का बहुत महत्व माना गया है। तो चलिए जानते हैं कि कौन से हैं वे चार काम
Makar sankranti 2021: सूर्य के मकर राशि में संक्रांति को कहते हैं मकर संक्रांति, इस दिन ये चार काम करने का है बहुत महत्व
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सूर्य आराधना
हिंदी कैलेंडर में चंद्र तिथि के अनुसार हर माह में दो पक्ष होते हैं। इसी तरह से सूर्य के आधार पर एक वर्ष में दो भाग होते हैं। जिसमें छ: माह तक सूर्य उत्तरायन रहता है एवं छ: माह दक्षिणायन। मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायन होता है, इसलिए इस पर्व को उत्तरायन भी कहा जाता है।इस दिन सूर्य पूजा और अर्घ्य अवश्य देना चाहिए।
मकर संक्रांति के दिन स्नान और दान करने का भी बहुत महत्व माना गया है। माना जाता है कि इस दिन किए गए पुण्य का आपको हजार गुना ज्यादा फल प्राप्त होता है। इस वर्ष कुंभ लगे होने के कारण संक्रांति पर स्नान करने का महत्व और भी बढ़ गया है। इस दिन विशेष तौर पर गाय को चारा खिलाना और तिल का दान करना बहुत पुण्य फलदायी माना गया है।
इस दिन तिल दान के साथ ही तिल, मूंगफली और गुड़ की बनी हुई पंजीरी, गजक आदि भी खाई जाती है। यानि स्वाद के साथ सेहत भी, क्योंकि इस समय सर्दी का मौसम रहता है। गुड़ और तिल की बनी हुई चीजें शरीर को गर्म रखने के साथ पोषक तत्व भी प्रदान करती हैं। इस दिन लोग तिल गजक भगवान को अर्पित करने के बाद प्रसाद वितरण करते हैं।
इस दिन पतंग उड़ानें की परंपरा है। आसमान में रंग-बिरंगी पतंगें बहुत ही सुंदर लगती हैं। कई जगहों पर मकर संक्रांति पर पतंग महोत्सव का आयोजन भी किया जाता है। इसके पीछे भी कारण है कि जब लोग पतंग उड़ाते हैं तो कुछ देर तक सूर्य के प्रकाश में रहते हैं। सूर्य का प्रकाश से विटामिन डी मिलता है, जो हमारी हड्डियों को मजबूत बनाने काम करता है।