शिवभक्तों के लिए अपने आराध्य देव भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए महाशिवरात्रि का पर्व विशेष होता है। महाशिवरात्रि पर शिव साधना करने से जीवन की परेशानियों और ग्रहों से सबंधित दोषों का निवारण होता है। महाशिवरात्रि पर भगवान भोले को प्रसन्न करने के लिए भक्त कई तरह की चीजों को उन्हें अर्पित करते हैं। ऐसे में कई बार जाने-अनजाने में भक्त ऐसी चीजें चढ़ाने लगते हैं जिसे शास्त्रों में वर्जित माना गया है।
महाशिवरात्रि 2020: शिव आराधना में भूलकर न करें शंख समेत इन सात चीजों का इस्तेमाल
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शिव आराधना में शंख है वर्जित
शिव उपासना में शंख का इस्तेमाल वर्जित माना गया है। दरअसल इसके पीछे एक पौराणिक कथा है। भगवान शिव ने शंखचूड़ नाम के असुर का वध किया था, जो भगवान विष्णु का भक्त था। शंख को उसी असुर का प्रतीक माना जाता है, इसलिए शिवजी की पूजा में शंख का प्रयोग नहीं करना चाहिए। ना ही शंख से शिवलिंग पर जलाभिषेक करें और पूजा में शंख बजाएं।
तुलसी को हिन्दू धर्म में विशेष महत्व होता है और सभी तरह की पूजा और शुभ कार्यों में इसका प्रयोग होता है, लेकिन तुलसी को भगवान शिव पर चढ़ाना मना है। भूलवश लोग भोलेनाथ की पूजा में तुलसी का इस्तेमाल करते हैं जिस वजह से उनकी पूजा पूर्ण नहीं होती।
तिल को शिवलिंग पर चढ़ाना वर्जित माना जाता है, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि यह भगवान विष्णु के मैल से उत्पन्न हुआ है।
भगवान शिव को अक्षत यानी साबूत चावल अर्पित किए जाने के बारे में शास्त्रों में लिखा है। टूटा हुआ चावल अपूर्ण और अशुद्ध होता है इसलिए यह शिव जी को नही चढ़ता।