विष्णु के अवतार का तो अक्सर जिक्र आता है, लेकिन शिव के अवतारों के बारे में कम ही लोग जानते हैं। कुछेक पुराण ग्रंथों में शिव के अवतारों का भी उल्लेख मिलता है। शिव के कुछ अवतार तंत्रमार्गी हैं, तो कुछ दक्षिणमार्गी।
विष्णु की तरह उनके भी अवतार प्रसिद्ध हैं। इन अवतारों में महाकाल, भुवनेश, षोडश, भैरव, छिन्नमस्त या गिरिजा, धूम्रवान, बगलामुख, मातंग और कमल की गणना होती है। ये सभी अवतार से संबंधित हैं।
शिव पुराण में दुर्वासा, महेश, वृषभ, पिप्पलाद, वैश्यानाथ, द्विजेश्वर, हंसरूप, अवधूतेश्वर, भिक्षुवर्य, सुरेश्वर, ब्रह्मचारी, सुनटनतर्क, द्विज, अश्वत्थामा, किरात, नतेश्वर और हनुमान आदि का उल्लेख भी है, लेकिन इन्हें अंशावतार माना जाता है। यूं शिव के उन्नीस अवतारों की चर्चा होती है, लेकिन इनमें ज्यादातर गण हैं।
गण अर्थात प्रतिनिधि या संदेशवाहक। गणो में एक थे भैरव। आज भी उनकी पूजा होती है। कथा के अनुसार, किसी समय ब्रह्मा और विष्णु अपने को श्रेष्ठ मानने लगे थे। भैरव ने शंकर की अनुमति से ब्रह्मा और विष्णु को सबक सिखाया।
शिव महापुराण में भैरव को शंकर का पूर्ण रूप बताया गया है। अश्वत्थामा, शरभ, गृहपति ऋषि दुर्वासा, हनुमान और वृषभ आदि अवतारों में भी शिव का ही अंश रहा है। पुराणों के अनुसार, शिव सृष्टि के आदि कारण हैं। वेदों में शिव का नाम ‘रुद्र’ रूप में आया है। रुद्र संहार के देवता हैं।