Krishna Janmashtami 2022 : नर रूप में लीला कर रहे नारायण श्रीकृष्ण की लीला को देखकर आम जन को तो भ्रम हो ही जाता था, खुद ब्रह्मा भी एक बार इस भ्रमजाल में फंस गए। इस भ्रमजाल में वह इतना उलझ गए कि उन्हें समझ में ही नहीं आ रहा था कि वृंदावन में गोवंश चरा रहा छोटा सा बालक भगवान कैसे हो सकता है। उन्हें लगा कि यह कोई सामान्य बालक है, लेकिन चूंकि भगवान के जन्म के वक्त खुद भी उनके चतुर्भूज रूप के साक्षी बने थे और भगवान की पूजा की थी। इसलिए वह कोई निर्णय नहीं कर पा रहे थे। इसी दुविधा को दूर करने के लिए ब्रह्मा ने भगवान की भी परीक्षा ले डाली। इस प्रसंग में हम उसी लीला की बात करेंगे।
Krishna Janmashtami 2022 : जब कान्हा की लीला से भ्रम में पड़ गए ब्रह्माजी, ले डाली श्रीकृष्ण की परीक्षा
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यह प्रसंग अगासुर के वध के बाद है। भगवान बालकृष्ण ने जंगल में गाय बछड़े चराते हुए जब अगासुर का वध किया तो उन्हें भूख लग आई। ऐसे में जो ग्वालबाल कलेवा लेकर गए थे, उसी में वह खाने लगे। चूंकि भगवान ने ग्वालों और उनके गौवंश की जान बचाई थी, इसलिए वह काफी उत्साहित थे। इसी उत्साह के चलते वह अपना जूठन भी भगवान को खिलाने लगे और स्नेहवस भगवान भी बड़े प्रेम से खाए जा रहे थे। यह दृश्य ब्रह्मलोक से ब्रह्माजी ने देखा तो वह हैरान रह गए कि आखिर कैसे स्वयं नारायण इस गंदगी में प्रसाद पा रहे है, भगवान किसी का जूठन नहीं खा सकते।
ब्रह्मा जी को ऐसा लगने लगा कि यह श्रीकृष्ण विष्णु के अवतार नहीं हो सकते। लेकिन वह सुन चुके थे कि श्रीकृष्ण ने कैसे अपने हाथों से महाशक्तिशाली राक्षसों का नाश किया है। इसलिए ब्रह्मा जी ने श्रीकृष्ण की परीक्षा लेने का विचार किया और चुपके से वहां से सभी गाय बछड़ों को चुरा लिया। इधर, श्रीकृष्ण और ग्वालबालों ने जब अपने गाय बछड़े नहीं देखे तो परेशान हो गए। उस समय भगवान ने ध्यान लगाया तो उन्हें सारा माजरा समझ में आ गया। अब उन्होंने ब्रह्माजी को सबक सिखाने के लिए सभी गाय बछड़े खुद बन गए। इसके बाद कृष्ण की हालत देखने के लिए ब्रह्मा जी दोबारा धरती पर आए तो देखा कि यहां कुछ हुआ ही नहीं, उन्होंने पलट कर ब्रह्मलोक में देखा तो वहां भी गाय बछड़े मौजूद थे।
ब्रह्मा जी धरती पर यह सबकुछ देख ही रहे थे कि भगवान श्रीकृष्ण खुद ब्रह्माजी बनकर ब्रह्मलोक पहुंच गए। इधर, ब्रह्माजी जब वापस पहुंचे और आंखें बंद कर नारायण का ध्यान किया और उनसे आग्रह किया कि उन्हें भी सच का ज्ञान हो। जिसके बाद उनके सामने श्रीकृष्ण अपने विराट रूप में आ गए और ब्रह्मा जी से कहा कि इस दुनिया में सबकुछ उनसे ही उत्पन्न हुआ है। इसके बाद ब्रह्माजी को अपनी मूर्खता पर ग्लानि हुई और भगवान की खूब स्तुति करते हुए माफी मांगी। भगवान ने ब्रह्माजी को माफ भी कर दिया और अपने गाय बछड़े लेकर वापस आ गए।
इस प्रसंग के दौरान भगवान ने ऐसी लीला की ग्वालों को कुछ ज्ञान नहीं हुआ। वह रोज गाय बछड़े भगवान कृष्ण को चराने जंगल जाते और शाम को वापस लौट जाते। लेकिन इतने में ब्रह्मलोक का एक पहर गुजर गया। यह एक पहर धरती के एक साल के बराबर होता है। एक साल बाद जब उनकी तंद्रा टूटी तो उन्हें लगा कि अभी अभी कृष्ण ने अगासुर का वध किया है। इसके बाद जंगल से घर लौटने के बाद ग्वालों ने अपनी अपनी माताओं को अगासुर के वध की कथा सुनाई।